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कश्मीर के केसर पर मौसम की मार : अक्टूबर की गर्मी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, कंद सूखने का सता रहा डर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 07 Oct 2026 08:54 AM IST
सार

कश्मीर में लंबे सूखे और सामान्य से करीब 5.6°C ज्यादा तापमान ने केसर की फसल पर संकट बढ़ा दिया है। पुलवामा और बडगाम के करेवा इलाकों में किसानों को केसर के कंद सूखने की चिंता है। अक्टूबर में फूल आने के समय पर्याप्त मिट्टी की नमी फसल के लिए बेहद अहम है।

केसर की खेती
केसर की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कश्मीर में लंबे समय से बारिश न होने और अक्टूबर में सामान्य से ज्यादा तापमान ने केसर की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पुलवामा और बडगाम जिले के करेवा इलाकों में सैकड़ों हेक्टेयर में फैले केसर के खेतों पर इसका असर दिखने लगा है। किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने में परेशानी हो रही है।

कश्मीर घाटी में सितंबर से मौसम मुख्य रूप से सूखा रहा है। अक्टूबर में तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया। श्रीनगर मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद के मुताबिक, 4 अक्टूबर को श्रीनगर का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1935 के बाद अक्टूबर में दूसरा सबसे अधिक तापमान है। 5 अक्टूबर को भी तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 5.6 डिग्री ज्यादा था।

नमी की कमी से केसर के कंद प्रभावित
लगातार गर्मी और सूखे के बीच किसानों के सामने खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने की चुनौती है। केसर के पौधे भूमिगत कंद (Corm) से निकलते हैं और इस समय इनकी बढ़वार के साथ फूल आने की प्रक्रिया शुरू होती है। केसर किसान अली मोहम्मद ने बिजनेस लाइन को बताया कि उन्होंने पानी की व्यवस्था के लिए अपने खेत के बीच में कुआं खुदवाया है। अब वह खेत में ड्रिप सिंचाई लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक, लगातार गर्मी और नमी की कमी से केसर के कंद सूखने लगे हैं।

अक्टूबर में नमी जरूरी
अक्टूबर केसर की फसल के लिए बेहद अहम महीना है। इसी दौरान पौधों की बढ़वार और फूल आने की प्रक्रिया होती है। इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी रहना अच्छी बढ़वार और फूलों के लिए जरूरी माना जाता है। लंबे समय तक सूखा रहने पर पौधों पर पानी की कमी का दबाव बढ़ सकता है। एक अन्य किसान अब्दुल मजीद ने कहा कि अगर कुछ और दिन बारिश नहीं हुई तो किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम में बदलाव और खेती की जमीन कम होने के कारण केसर की पैदावार पहले ही प्रभावित हुई है।

20-25 हजार परिवारों की आजीविका
कश्मीर में केसर की खेती करीब 20,000 से 25,000 परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। क्षेत्र में सामान्य तौर पर हर साल करीब 13-14 टन केसर का उत्पादन होता है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन में उतार-चढ़ाव, मौसम की अनिश्चितता और खेती की बढ़ती लागत ने उनकी मुश्किलें बढ़ाई हैं। ऐसे में अगर इस साल भी उत्पादन कमजोर रहा तो किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
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