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Fly Agricultural Drones Opening Door Employment Kau Begins Preparations To Expand Training
कृषि ड्रोन उड़ाना सीखें: रोजगार का रास्ता खुलेगा, KAU ने शुरू की ट्रेनिंग बढ़ाने की तैयारी
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 07 Oct 2026 08:47 AM IST
सार
केरल कृषि विश्वविद्यालय और फ्यूजलेज फ्लाइंग क्लब ने कृषि ड्रोन पायलट ट्रेनिंग का विस्तार करने के लिए MoU किया है। विश्वविद्यालय में अब तक करीब 300 लोग ड्रोन ट्रेनिंग ले चुके हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोगों को लाइसेंस मिल चुका है। फ्यूजलेज से ड्रोन खरीदने वाले ग्राहकों को मुफ्त पायलट ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
खेती में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल और युवाओं के लिए रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर बढ़ाने के लिए केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) और फ्यूजलेज फ्लाइंग क्लब प्राइवेट लिमिटेड ने समझौता किया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में चल रहे रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) की गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। इस संबंध में KAU के रजिस्ट्रार और फ्यूजलेज फ्लाइंग क्लब की निदेशक देविका चंद्रशेखर ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय का RPTO उसके एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर के तहत संचालित होता है।
NABARD की पहल से शुरू हुआ था ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर
KAU में ड्रोन पायलट ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत NABARD की पहल के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य तकनीक के इस्तेमाल से कृषि को मजबूत करना है। कृषि ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली फ्यूजलेज इनोवेशंस को उत्कृष्ट कृषि स्टार्टअप के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। कंपनी देवन चंद्रशेखर और देविका चंद्रशेखर के नेतृत्व में कृषि ड्रोन का स्वदेशी विकास और निर्माण करती है।
KAU की कुलपति टी. सजिता रानी ने कहा कि फ्यूजलेज की तकनीकी विशेषज्ञता और उद्यमिता का अनुभव विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध क्षमता को मजबूत करेगा। इससे कृषि में नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
ड्रोन खरीदने वालों को मुफ्त पायलट ट्रेनिंग
देविका चंद्रशेखर ने बताया कि सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना के तहत कृषि ड्रोन खरीदे जा सकते हैं। फ्यूजलेज से ड्रोन खरीदने वाले ग्राहकों को ड्रोन पायलट ट्रेनिंग मुफ्त दी जाएगी।
खेती में इन कामों में उपयोगी है ड्रोन
कृषि ड्रोन का इस्तेमाल सटीक खेती, फसल की निगरानी, फसल प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसे कामों में किया जा सकता है। इससे खेतों तक कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों को पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है। केरल में कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी को देखते हुए ड्रोन जैसी तकनीक खेती की कार्यक्षमता बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।
300 लोगों ने ली ड्रोन ट्रेनिंग
KAU के एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर के प्रमुख के.पी. सुधीर ने बताया कि विश्वविद्यालय का ड्रोन पायलट ट्रेनिंग सेंटर अब तक करीब 300 लोगों को प्रशिक्षण दे चुका है। इनमें से 100 से ज्यादा लोगों ने ड्रोन पायलट लाइसेंस हासिल किया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, ड्रोन तकनीक के विस्तार से छात्रों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए नए कारोबार और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही कृषि क्षेत्र में तकनीक को तेजी से अपनाने में भी मदद मिलेगी।
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