चक्रवात और समुद्री मौसम से जुड़ी चेतावनियों को समय पर समझने और लोगों तक पहुंचाने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों, विभिन्न हितधारकों और मीडिया प्रतिनिधियों सहित 650 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसका वीडियो आम लोग भी यूट्यूब पर देख सकते हैं।
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कार्यशाला की शुरुआत में चक्रवात की भविष्यवाणी में हुई प्रगति और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियों को समय पर लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका है। खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और मछुआरों तक सही जानकारी पहुंचना जरूरी है।
कार्यशाला में मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने चक्रवात चेतावनी सेवाओं और समुद्री मौसम संबंधी सेवाओं के बारे में जानकारी दी। इसमें तटीय समुदायों, मछुआरों, बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए जारी किए जाने वाले पूर्वानुमान और चेतावनी बुलेटिन की जानकारी शामिल थी।
कार्यशाला का एक प्रमुख हिस्सा मौसम विभाग की ओर से विकसित चक्रवात एवं समुद्री मौसम सेवाओं के निर्णय सहायता तंत्र (DSS) का प्रदर्शन रहा। यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो आम लोगों, संबंधित संस्थाओं और आपदा प्रबंधन अधिकारियों को समय पर निर्णय लेने में मदद करने के लिए बनाया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य चक्रवात और समुद्री मौसम संबंधी सेवाओं की समझ बढ़ाना और चेतावनियों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाना है।
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