महाराष्ट्र : 265 तालुकों में सूखा, खेतों में उजड़ी फसल, सूखे जलाशय; मुआवजे-राहत की आस में किसान
गांव जंक्शन डेस्क, शिमला
Published by: Umashankar Mishra
Updated Fri, 09 Oct 2026 08:51 PM IST
सार
महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखे ने खेती और ग्रामीण जीवन को संकट में डाल दिया है। छत्रपति संभाजीनगर और बीड में केंद्रीय टीम ने फसल नुकसान का जायजा लिया, जबकि किसानों ने प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपये मुआवजे और लंबित बीमा भुगतान की मांग की। लातूर की रेणा सिंचाई परियोजना में महज 20 प्रतिशत पानी बचा है, जिससे फसल बचाने के साथ पेयजल और पशुओं के चारे की चिंता भी गहरा गई है। जानिए, विस्तार से...
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था। राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुके इसकी चपेट में हैं।
- फोटो : गांव जंक्शन (सांकेतिक तस्वीर)
महाराष्ट्र के खेतों में कभी लहलहाती फसलें अब सूखे की तपिश में मुरझा गई हैं। कहीं कपास और सोयाबीन के पौधे ठूंठ बनकर रह गए हैं, तो कहीं गन्ने की सूखी फसल पशुओं के चारे के काम आने लायक भी नहीं बची। कुओं का पानी घट रहा है, नदियों के तल सूख रहे हैं और बांधों में बचा पानी पीने की जरूरतों के लिए संभालकर रखा जा रहा है।
इस संकट के बीच किसानों की सबसे बड़ी चिंता है - फसल में लगी पूंजी कैसे निकलेगी, कर्ज कैसे चुकाया जाएगा और अगली फसल के लिए पानी कहां से आएगा?
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में हालात का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम के सामने किसानों ने अपनी मुश्किलें रखीं। छत्रपति संभाजीनगर और बीड जिलों में खेतों का निरीक्षण कर रही टीम से किसानों ने तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। उनका कहना है कि जब फसल ही हाथ से निकल गई, तो राहत के लिए लंबी सरकारी प्रक्रियाओं का इंतजार उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
सूखे खेतों में फसल का नुकसान
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में केंद्रीय टीम ने छत्रपति संभाजीनगर जिले के डेमनी गांव में किसान विलास शिंदे के खेत का निरीक्षण किया। एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगी उनकी सोयाबीन की फसल लंबे समय तक बारिश न होने के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गई।
किसान साइनाथ शिंदे ने बताया कि कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। प्रति एकड़ करीब 50 से 60 हजार रुपये खर्च करने के बावजूद पूरी उपज हाथ से निकल गई। उन्होंने मांग की कि किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार रुपये की सहायता तत्काल दी जाए, ताकि वे कर्ज चुका सकें और आगे की खेती की तैयारी कर सकें।
एक अन्य किसान सोमनाथ शिंदे ने कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की। उनके मुताबिक, बार-बार पड़ रहे सूखे से खेतों की उपज तो प्रभावित हुई ही है, पशुओं के लिए चारे और परिवारों के सामने बच्चों की स्कूल फीस चुकाने का संकट भी खड़ा हो गया है। किसानों ने आर्थिक मदद के साथ बांधों और बैराजों के निर्माण जैसे दीर्घकालिक जल संरक्षण उपायों पर भी जोर दिया।
265 तालुकों में सूखे का एलान
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था। राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुके इसकी चपेट में हैं। सरकार ने राहत के तहत फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत और बिजली बिलों में सब्सिडी जैसे उपायों की घोषणा की है।
सूखे का असर राज्य के विभिन्न संभागों में व्यापक है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में सबसे अधिक 74 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। इसके बाद अमरावती में 56, नासिक में 49, नागपुर में 39, पुणे में 35 और ठाणे संभाग में 12 तालुके शामिल हैं। ठाणे संभाग की सूची में रायगढ़ के एक, रत्नागिरी के तीन और सिंधुदुर्ग के आठ तालुके भी हैं।
बीड में ठूंठ बने खेत, दो साल के बीमा का इंतजार
बीड जिले के गेवराई और बीड तहसीलों में भी केंद्रीय टीम ने प्रभावित खेतों का जायजा लिया। यहां किसानों ने तत्काल आर्थिक सहायता के साथ दो साल से लंबित फसल बीमा भुगतान जारी करने की मांग की।
गेवराई तहसील के अर्धमसला, रणमाला और जटेगांव फाटा में खड़ी फसलें सूखकर ठूंठ बन गई हैं। किसान सुरेश और संतोष नरवड़े ने जली-सी दिखने वाली कपास और गन्ने की फसलों की ओर इशारा करते हुए बताया कि बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च की गई रकम डूब गई है। फसल पशुओं के चारे के लायक भी नहीं बची।
गेवराई के किसान मदन रामभाऊ मोटे ने बताया कि कुओं में पानी घटने के कारण किसानों को निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। बीड तहसील के नांदुर हवेली में केंद्रीय टीम ने सिंधफना नदी का सूखा तल देखा। वहीं, महत्वपूर्ण माजलगांव बांध में जीवित जल भंडारण अपनी औसत क्षमता के महज 26 प्रतिशत तक सिमट गया है। किसानों ने चेक डैम बनाने, बांधों से गाद निकालने और भूजल पुनर्भरण के ढांचे विकसित करने की मांग की।
बीड तहसील के परगांव जापती गांव में टीम ने किसान सतीश देवले के सोयाबीन खेत का निरीक्षण किया, जहां पौधों की बढ़वार सूखे से प्रभावित थी। टीम अगले चरण में मंजर्सुंबा, खंडाला, वैद्यकिन्ही, सोंगांव और पाटोदा के इलाकों का दौरा कर जिला कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक करेगी। अधिकारियों के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर निरीक्षण के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
लातूर में बांध का पानी पीने के लिए सुरक्षित
सूखे का दबाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है। लातूर जिले में रेणा मध्यम सिंचाई परियोजना में अब लगभग 20 प्रतिशत पानी ही बचा है। गुरुवार को जिला कलेक्टर भारत बस्तेवाड़, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल कुमार मीणा और लातूर नगर निगम आयुक्त राहुल कुलकर्णी ने परियोजना का निरीक्षण किया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि रेणा परियोजना में बचा पूरा पानी पेयजल के लिए सुरक्षित रखा गया है। अवैध रूप से पानी उठाने की कोशिशों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी को ऐसे पंपों की बिजली आपूर्ति काटने के लिए कहा गया है, जिनका इस्तेमाल अनधिकृत रूप से पानी निकालने में हो रहा है।
कलेक्टर इससे पहले मांजरा और लोअर तेरणा सिंचाई परियोजनाओं का भी निरीक्षण कर चुके हैं। अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में पशुओं के चारे की उपलब्धता की समीक्षा की और परियोजना के आसपास खेतों का जायजा लेकर किसानों की जरूरतें समझीं।
राहत के साथ पानी बचाने की चुनौती
महाराष्ट्र में सूखे की यह तस्वीर तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत के साथ भविष्य की खेती के लिए पानी सुरक्षित रखने की चुनौती भी सामने रखती है। किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, लंबित बीमा भुगतान और कर्ज चुकाने के लिए मदद चाहिए। वहीं, घटते जल भंडार और सूखते भूजल स्रोत बताते हैं कि केवल मौसमी राहत से संकट का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
चेक डैम, जलाशयों से गाद निकासी, भूजल पुनर्भरण और पानी के नियोजित उपयोग जैसे उपाय आने वाले कृषि मौसम के लिए अहम हो सकते हैं। फिलहाल, सूखे खेतों में खड़े किसानों की निगाहें केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और सरकार से मिलने वाली राहत पर टिकी हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।