हिमाचल प्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लाल धान की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ खेतों में पहुंचकर किसानों को इसकी वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन और बेहतर उत्पादन के तरीके बता रहे हैं। विशेषज्ञों का जोर है कि किसान बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल का चुनाव करें, ताकि खेती से अधिक आमदनी हासिल कर सकें।
इसी उद्देश्य से पालमपुर की खंड परियोजना प्रबंधन इकाई ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण परियोजना (जायका) के तहत लाल धान की खेती पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें बहाव सिंचाई योजना वैदां दी कूहल से जुड़े लाभार्थी किसानों ने हिस्सा लिया।
खेतों में पहुंचकर फसल का किया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के खेतों में खड़ी लाल धान की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने पौधों की वृद्धि, फसल की मौजूदा स्थिति, रोग और कीटों के प्रकोप के साथ उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया। किसानों को फसल की बेहतर देखभाल और पैदावार बढ़ाने के लिए जरूरी तकनीकी सुझाव भी दिए गए। विशेषज्ञों ने उर्वरकों का सही चयन करने, रोग-कीटों का प्रबंधन करने और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने की जानकारी दी।
बाजार की मांग के अनुसार खेती पर जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि फसल विविधीकरण और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने से किसानों को बेहतर आमदनी मिल सकती है। लाल धान की मांग को देखते हुए किसान इसकी खेती की संभावनाएं तलाश सकते हैं। हालांकि, खेती का रकबा बढ़ाने से पहले स्थानीय बाजार, बिक्री की व्यवस्था और उत्पादन लागत का आकलन करना भी जरूरी है। शैप (SHEP) पद्धति का उद्देश्य किसानों को बाजार की जरूरतों के मुताबिक फसल चुनने और उत्पादन की योजना बनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
वैज्ञानिकों ने बताए खेती के तरीके
कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. डीपी पांडे और धान एवं गेहूं अनुसंधान केंद्र, मलां की वैज्ञानिक डॉ. शबनम कटोच ने किसानों को लाल धान की वैज्ञानिक खेती के बारे में बताया। उन्होंने उर्वरकों के उचित इस्तेमाल, रोग-कीट प्रबंधन और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी उपायों की जानकारी दी।
जिला परियोजना प्रबंधन इकाई, पालमपुर के विषय विशेषज्ञ डॉ. रजनीश शर्मा ने किसानों को शैप पद्धति और आगामी रबी फसलों की तैयारी के बारे में बताया। कार्यक्रम में जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. योगेंद्र पॉल कौशल, खंड परियोजना प्रबंधक अमित भूषण सहित परियोजना इकाई के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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