विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Weak Monsoon And Rising Inflation Threaten Market Recovery And Rural Demand Report

कमजोर मानसून ने बढ़ाई बाजार की चिंता: कम बारिश से फसलों संग ग्रामीण परिवारों की क्रयशक्ति पर पड़ सकता है असर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 12 Oct 2026 02:08 PM IST
सार

पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून, बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरों से शेयर बाजार में जल्द बड़ी रिकवरी की संभावना कम है। बारिश की कमी से खेती और ग्रामीण मांग प्रभावित होने का खतरा है, जिसका असर वाहन, कपड़े और रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों की बिक्री पर पड़ सकता है।

कमजोर मानसून के चलते खेती और ग्रामीण मांग पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
कमजोर मानसून के चलते खेती और ग्रामीण मांग पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महंगाई और कमजोर मानसून के कारण भारतीय शेयर बाजार में जल्द तेज रिकवरी की उम्मीद कम है। ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य पदार्थों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ऊंची ब्याज दरें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए रख सकती हैं। कमजोर मानसून के चलते खेती और ग्रामीण मांग पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी पिछले छह सप्ताह में 8.2 फीसदी और 2026 की शुरुआत से अब तक 6 फीसदी गिर चुका है। फर्म का मानना है कि बाजार में स्थिरता आने से पहले और गिरावट संभव है।

कमजोर मानसून से गांवों की मांग पर चिंता
रिपोर्ट में मानसून की बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रहने को कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया गया है। बारिश की कमी से फसलों की उपज और किसानों की आमदनी पर असर पड़ सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों की खरीदारी क्षमता कमजोर होने की आशंका है।

ग्रामीण मांग में कमी का असर कपड़े, दोपहिया और चारपहिया वाहन, रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान तथा मकानों से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है। त्योहारों के बाद महंगाई बढ़ने से इन क्षेत्रों में खर्च घटने का जोखिम भी जताया गया है।

कंपनियों की कमाई के अनुमान में कटौती
पीएल कैपिटल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निफ्टी की प्रति शेयर कमाई (EPS) के अनुमान में 1.3 फीसदी और 2027-28 के लिए 0.5 फीसदी की कटौती की है। इसके बावजूद फर्म को चालू वित्त वर्ष में प्रति शेयर कमाई 16.1 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 14.9 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तिमाही में तेल और गैस क्षेत्र को छोड़कर उसके विश्लेषण के दायरे वाली कंपनियों की बिक्री सालाना आधार पर 16.2 फीसदी और परिचालन लाभ (EBITDA) 14.7 फीसदी बढ़ सकता है। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव है। जिन 27 उद्योग क्षेत्रों पर फर्म नजर रखती है, उनमें से 16 में परिचालन लाभ का मार्जिन घटा है।

किन क्षेत्रों पर भरोसा, कहां सावधानी?
पीएल कैपिटल ने पूंजीगत सामान, स्वास्थ्य सेवा, बैंक, धातु, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार और बंदरगाह क्षेत्रों को तरजीह दी है। वहीं, वाहन, आईटी सेवाओं, उपभोक्ता कंपनियों और तेल-गैस क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 30 से अधिक केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में 25 से 200 आधार अंकों तक बढ़ोतरी की है। अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता प्रतिफल भी भारतीय बाजार में विदेशी निवेश को सीमित कर सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 7.1 फीसदी किया है। हालांकि, आगे बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि महंगाई, मानसून की कमी और वैश्विक घटनाक्रम का उपभोक्ता मांग तथा कंपनियों की कमाई पर कितना असर पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन