अगर सूखे की जानकारी कुछ हफ्ते पहले से मिले जाए, तो किसान कई ऐसे कदम उठा सकते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान कम हो सकता है। इन कदमों में कम जल खपत वाली फसलों का चुनाव और बारिश का जल सहेजने के लिए ढांचा शामिल है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की रिसर्ट टीन ने एक पॉर्टल तैयार किया है, जो पूरे भारत में चार हफ्ते पहले ही खेती वाले इलाकों में सूखे का अनुमान लगाकर चेतावनी दे सकता है।
इस पोर्टल का नाम KrishiDrought (कृषि-ड्रॉट) रखा गया है। आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म सैटेलाइट से मिली जानकारी, पानी व जलवायु से जुड़े आंकड़ों (हाइड्रोक्लाइमैटिक डेटा) और आधुनिक 'डीप लर्निंग' मॉडल का एक साथ इस्तेमाल करता है। इसके जरिए मिट्टी की बदलती नमी पर नजर रखी जाती है और सूखे का अनुमान लगाया जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मिट्टी की नमी खेती के स्वास्थ्य के लिए एक बहुत जरूरी संकेत है, क्योंकि इससे पता चलता है कि जमीन के अंदर फसल की बढ़त के लिए कितना पानी मौजूद है। नमी में होने वाले बदलावों पर नजर रखने से उन इलाकों की आसानी से पहचान की जा सकती है, जहां सूखे का खतरा हो सकता है।
जिला स्तर पर मिलेगी सटीक जानकारी
यह पोर्टल हर हफ्ते सूखे का अनुमान जारी करेगा। इसमें लगभग 9 किलोमीटर के दायरे (स्पेशियल रेजोल्यूशन) तक की सटीक जानकारी मिलेगी, जो कि सीधे जिला स्तर पर उपलब्ध होगी।
4 हफ्ते पहले मिलने वाली इस चेतावनी से किसानों, सरकारी एजेंसियों और इससे जुड़े अन्य लोगों को सूखे के खतरे को समझने और उससे निपटने की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
नुकसान से बचाने की एक बड़ी पहल
आईआईटी बॉम्बे ने अपने आधिकारिक एक्स पर इस पहल की घोषणा करते हुए लिखा, "हमें KrishiDrought.in के लॉन्च की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जो पूरे भारत में साप्ताहिक कृषि सूखा पूर्वानुमान प्रदान करने वाला एक पब्लिक पोर्टल है..." संस्थान ने इस प्लेटफॉर्म को बनाने में योगदान देने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं को बधाई भी दी।
इस पब्लिक प्लेटफॉर्म का मुख्य मकसद बदलते मौसम की चुनौतियों के बीच किसानों, सरकारी विभागों और दूसरे लोगों को समय पर सही फैसले लेने में मदद करना है। इससे सूखे की स्थिति से निपटने की तैयारी की जा सकेगी और खेती में होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा।