राजस्थान के किसान इन दिनों रबी फसलों की बुवाई शुरू करने के लिए चुनौती का सामना कर रहे हैं। मानसून के मौसम में कम बारिश और दिन के समय चढ़ते तापमान के कारण मिट्टी में नमी की कमी है। जानकारों के अनुसार, जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, सिर्फ वही बुवाई कर पा रहे हैं। दूसरे किसान तापमान गिरने और सर्दियों की हल्की बारिश होने का इंतजार कर रहे हैं।
जल्द बुवाई करने पर फसल सूखने का खतरा
कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेज गर्मी और खेतों में कम नमी के बीच अगर अभी बुवाई की जाती है, तो बीज अंकुरित होने के तुरंत बाद फसलें सूख सकती हैं। राजस्थान कृषि विभाग के मुताबिक, मौसम की इसी मार के चलते अक्टूबर के आखिरी हफ्ते तक सरसों को छोड़कर बाकी ज्यादातर फसलों की बुवाई अपने तय लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत ही हो पाई है।
गेहूं के रकबे में बढ़ोती की योजना
कृषि विभाग ने साल 2026-27 के रबी सीजन के लिए अलग-अलग फसलों की बुवाई के लक्ष्य तय किए हैं। इस बार गेहूं की बुवाई का लक्ष्य घटाकर 34.50 लाख हेक्टेयर रखा गया है, जबकि पिछले सीजन में यह 39.97 लाख हेक्टेयर था। हालांकि कुछ जानकार इस बार गेहूं के रकबे में कमी आने की बात कह रहे हैं।
चने का लक्ष्य बढ़ा, सरसों में मामूली गिरावट
चने की खेती का लक्ष्य पिछले साल के 20.41 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर इस बार 21.50 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। वहीं, मोटे अनाज माने जाने वाले जौ का लक्ष्य भी 2.80 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 4 लाख हेक्टेयर किया गया है। सरसों की बुवाई का लक्ष्य 37.50 लाख हेक्टेयर रखा गया है, जो पिछले सीजन (37.62 लाख हेक्टेयर) से थोड़ा ही कम है। खराब मौसम के बावजूद सिंचाई की सुविधा वाले किसान सरसों बो रहे हैं। विभाग के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते तक सरसों के लक्ष्य का 14.41 प्रतिशत हिस्सा बोया जा चुका था।
16 साल में सबसे कम बारिश, कई जिलों में सूखे जैसे हालात
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राजस्थान में इस बार मानसून के दौरान 20 प्रतिशत से अधिक कम बारिश दर्ज की गई है। यह पिछले 16 सालों में बारिश की सबसे बड़ी कमी है। इस वजह से राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं।