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उत्तराखंड : 71 साल से वन कानूनों में जकड़े 42 गांव, आज भी सड़क-पानी और नेटवर्क का इंतजार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Nov 2026 05:04 PM IST
सार

उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड के 42 गांव 71 साल से सड़क, पेयजल और संचार सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। गोविंद वन्यजीव विहार के वन कानूनों के कारण विकास कार्य प्रभावित होने की ग्रामीणों ने शिकायत की है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के 42 गांवों में रहने वाले लोग पिछले 71 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोविंद वन्यजीव विहार के सख्त वन कानूनों के कारण इन गांवों में सड़क, पेयजल और संचार सुविधाओं का विकास प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मिलने वाले वन अधिकारों का लाभ उठाने में भी परेशानी होती है।

मोरी विकासखंड की पांच दूरस्थ पट्टियों के इन गांवों में जल जीवन मिशन की कई योजनाएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। सड़क और पुलों का निर्माण भी अटका हुआ है। इतना ही नहीं, मोबाइल और इंटरनेट जैसी संचार सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बीएसएनएल को केबल बिछाने की अनुमति भी नहीं मिल सकी है।

1955 में गोविंद वन्यजीव विहार में शामिल हुई थी जमीन
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1955 में मोरी विकासखंड के बड़ासू, पंचगाई, अढोड़, फते पर्वत और सिंगतूर पट्टी के तहत आने वाली 957.96 हेक्टेयर भूमि को गोविंद वन्यजीव विहार में शामिल किया गया था। इसके बाद से इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को अपने हक-हकूकों के इस्तेमाल में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी जगदीश रांगड़ और राजपाल रावत का कहना है कि ग्रामीणों को मकान बनाने और अन्य जरूरतों के लिए फ्री ग्रांट और पीडी की लकड़ी तक आसानी से नहीं मिल पाती। उनका आरोप है कि वन कानूनों के कारण क्षेत्र का विकास भी प्रभावित हो रहा है।

2014 में घोषणा के बाद भी नहीं मिली राहत
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों ने कई बार शासन और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर वन अधिकारों में राहत देने की मांग की, लेकिन अब तक स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुल, पेयजल और संचार जैसी सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से बातचीत करने की मांग की है।

ग्रामीणों के हक-हकूकों के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव
गोविंद वन्यजीव विहार की उपनिदेशक निधि सेमवाल के अनुसार, ग्रामीणों के हक-हकूकों को लेकर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र की ओर से लोगों को सुविधाएं देने के लिए टौंस वन प्रभाग से व्यवस्था करने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को उनके क्षेत्र में ही हक-हकूक उपलब्ध कराने के लिए एक और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
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