अप्रैल से जुलाई के चार महीनों में भारत ने विदेश से 17 लाख टन दालों की खरीद की है। खरीफ दलहन उत्पादन में गिरावट और मजबूत होते अल नीनो के बीच आयात में उछाल दर्ज किया गया है। दूसरी ओर आगामी महीनों में कनाडा में पीली मटर और मसूर की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष (2026-27) के इन चार महीनों में दालों का आयात 62 फीसदी बढ़कर 17 लाख टन पहुंचा है। मूल्य के लिहाज से भी दालों का आयात 32 फीसदी बढ़कर 0.97 अरब डॉलर हो गया। इसका मतलब है कि भारत की मांग बढ़ने के बावजूद वैश्विक बाजार में दालों की कीमतें अभी अपेक्षाकृत कम बनी हुई थीं।
मसूर और पीली मटर के आयात में बड़ी बढ़ोतरी
अप्रैल-जुलाई के दौरान मसूर का आयात 227 फीसदी बढ़कर 0.57 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में पीली मटर का आयात 91 फीसदी बढ़कर 0.52 मिलियन टन रहा।वहीं, तुअर का आयात 7 फीसदी बढ़कर 0.31 मिलियन टन हो गया। दूसरी ओर, उड़द के आयात में 20 फीसदी की कमी आई और यह 0.18 मिलियन टन रह गया।
रूस से आपूर्ति प्रभावित
व्यापारियों के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में दालों का आयात धीमा हो सकता है। कनाडा से आने वाली पीली मटर और मसूर की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसकी एक वजह रूस से आपूर्ति प्रभावित होना बताई गई है।
दालों के आयात की दिशा खरीफ और रबी की पैदावार पर निर्भर
जानकारों का कहना है कि रूस से पीली मटर और मसूर लेकर आने वाले जहाज बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इसके पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पैदा हुई परिवहन समस्या जिम्मेदार हैं। जानकार बताते हैं कि आगामी महीनों में दलहन आयात की दिशा खरीफ और रबी दलहन फसलों की उपज पर निर्भर करेगी।
खरीफ दालों की बुवाई पूरी, रबी फसल पर मौसम का असर
खरीफ दालों की बुवाई पूरी हो चुकी है। इस सीजन में दालों का रकबा 11.84 मिलियन हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 1.42 फीसदी अधिक है। आने वाले सर्दियों के महीनों में बारिश और तापमान का पैटर्न चना और मसूर की बुवाई को प्रभावित करेगा। चना और मसूर रबी सीजन की प्रमुख दालों में शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दाल आयात सालाना आधार पर 34 फीसदी घटकर 3.63 अरब डॉलर रह गया था। व्यापार सूत्रों ने इसकी वजह कमजोर मांग और घरेलू स्तर पर अच्छी फसल को बताया था। वित्त वर्ष 2024-25 में दालों का आयात रिकॉर्ड 5.54 अरब डॉलर रहा था।
बफर स्टॉक से दाल जारी करने की तैयारी
सरकार ने हाल ही में कहा है कि अगर निकट अवधि में दालों की कीमतें बढ़ती हैं तो बफर स्टॉक से दालों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। फिलहाल सरकार के पास करीब 4.5 मिलियन टन दालों का स्टॉक है। भारत अपनी सालाना दाल खपत का करीब 18-20 फीसदी हिस्सा आयात करता है। इसमें तुअर, उड़द, मसूर, पीली मटर और चना शामिल हैं। इन दालों का आयात कनाडा, रूस, ब्राजील, म्यांमार और अफ्रीकी देशों से किया जाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 60 लाख टन दालों के आयात में तुअर की हिस्सेदारी 25 फीसदी थी। इसके बाद मसूर की हिस्सेदारी 19 फीसदी, पीली मटर की 18 फीसदी और उड़द की 16 फीसदी रही।