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Villagers Protest Ken Betwa River Linking Project Over Displacement And Compensation
बुंदेलखंड में नदी जोड़ परियोजना पर विवाद: केन पर बांध से विस्थापन का डर, जमीन छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण
गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़
Published by: Umashankar Mishra
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:26 PM IST
सार
मध्य प्रदेश की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ पन्ना जिले में ग्रामीणों का विरोध जारी है। प्रभावित परिवार मुआवजा और पुनर्वास बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि पर्यावरणविदों ने पन्ना टाइगर रिजर्व और परियोजना की वैज्ञानिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। जानिए, विस्तार से...
केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड के बड़े क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलने की बात कही जा रही है।
- फोटो : गांव जंक्शन (सांकेतिक तस्वीर)
मध्य प्रदेश में केन नदी पर बांध निर्माण से प्रभावित ग्रामीण भारत की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना का विरोध कर रहे हैं। पन्ना जिले में आदिवासी परिवारों का कहना है कि परियोजना के कारण उनके घर, मंदिर और पुश्तैनी जमीन डूबने के खतरे में हैं। ग्रामीण बेहतर मुआवजे और रहने के लिए दूसरी जगह की मांग कर रहे हैं।
यह परियोजना करीब 8.7 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना के पहले चरण का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़कर बुंदेलखंड जैसे पानी की कमी वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है।
मुआवजे के बावजूद ग्रामीण नाराज
केन नदी के किनारे रहने वाली आदिवासी महिला बिट्टी बाई कोंदार और उनके परिवार के सदस्य विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। उनका कहना है कि बढ़ते पानी से गांव प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार की ओर से दिया जा रहा मुआवजा घर और जमीन छोड़ने से होने वाले सभी नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।
प्रशासन के मुताबिक, प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाकर कम से कम 12.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। जिला प्रशासन का कहना है कि 90 फीसदी से अधिक लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। हालांकि, कुछ ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हैं।
स्थानीय पुजारी धनिराम भटनागर ने बताया कि जिस मंदिर से उनकी आजीविका चलती थी, वह पूरी तरह डूब चुका है। उनका कहना है कि मुआवजा केवल घर के लिए दिया जा रहा है, जबकि मंदिर से होने वाली कमाई भी खत्म हो गई है।
पन्ना टाइगर रिजर्व पर असर की चिंता
पर्यावरणविदों ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चिंता जताई है। प्रस्तावित दौधन बांध करीब दो किलोमीटर लंबा होगा और इससे लगभग 9,000 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आ सकती है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा शामिल होने की आशंका है। सरकार का कहना है कि पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को पूरी तरह टालना संभव नहीं है, लेकिन पेड़ लगाने और वन्यजीव संरक्षण जैसे उपायों से इसे कम किया जा सकता है।
परियोजना की व्यवहार्यता पर भी सवाल
दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल के समन्वयक हिमांशु ठक्कर ने परियोजना के पीछे के जल संबंधी अनुमानों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केन नदी बेसिन में अतिरिक्त पानी और बेतवा बेसिन में पानी की कमी के दावे की वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है।
सरकार का पक्ष है कि नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड में पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन को मदद मिलेगी। हालांकि, विस्थापन, मुआवजे और पर्यावरण से जुड़े विवादों के कारण परियोजना को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
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