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उत्तराखंड : पहाड़ों में ट्राउट मछली पालन से बढ़ेगी किसानों की कमाई, नेपाल तक हो रहा निर्यात

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 18 Oct 2026 04:38 PM IST
सार

  • केंद्रीय मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर को मुनस्यारी का दौरा किया।

  • पिथौरागढ़ को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है।

  • ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में ट्राउट का सालाना उत्पादन करीब 5,000 मीट्रिक टन पहुंचा है।

  • पिछले एक दशक में ट्राउट उत्पादन लगभग छह गुना बढ़ा है।

मछली पालन
मछली पालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में ट्राउट मछली पालन किसानों और ग्रामीण परिवारों की कमाई का नया जरिया बन रहा है। पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में ग्लेशियर से निकलने वाली नदियों और ठंडे पानी की अनुकूल परिस्थितियों के कारण रेनबो ट्राउट मछली पालन को बढ़ावा मिल रहा है। अब यहां उत्पादित ट्राउट मछली नेपाल को भी भेजी जा रही है। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए समझौते के तहत आईटीबीपी को भी ट्राउट की आपूर्ति की जा रही है।

मत्स्य पालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर को मुनस्यारी का दौरा कर ठंडे पानी में मछली पालन से जुड़ी गतिविधियों और क्लस्टर विकास की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जोहार मत्स्य स्वायत्त सहकारिता और नमजला ट्राउट फार्म में मछली पालकों से बातचीत की। उन्होंने रेनबो ट्राउट पालन को आजीविका का टिकाऊ साधन बनाने में स्थानीय सहकारी समितियों की भूमिका की सराहना की।

छह पहाड़ी राज्यों में ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत देश में 34 मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किए हैं। इनमें पिथौरागढ़ को ठंडे पानी में मछली पालन यानी कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों को मजबूत करना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कमाई के अवसर बढ़ाना तथा पहाड़ी क्षेत्रों में टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है।

उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी ठंडे पानी में मछली पालन की अच्छी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों की ठंडी नदियां, ऊंचाई पर स्थित झीलें और साफ जलधाराएं रेनबो ट्राउट जैसी मछलियों के पालन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं।

एक दशक में छह गुना बढ़ा ट्राउट उत्पादन
मत्स्य विभाग के अनुसार, देश के ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में ट्राउट का सालाना उत्पादन बढ़कर करीब 5,000 मीट्रिक टन हो गया है। पिछले एक दशक में इसमें लगभग छह गुना बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इन क्षेत्रों में मछली पालन को बेहतर बनाने के लिए 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके तहत मछली पालन के लिए विशेष जल-टैंक (रेसवे), मछली बीज उत्पादन केंद्र, चारा मिल, कोल्ड स्टोरेज और मछली पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित रखने से जुड़ी सुविधाओं को मंजूरी दी गई है।

उत्तराखंड में 317 करोड़ रुपये की परियोजनाएं
उत्तराखंड में मत्स्य पालन से जुड़ी 317 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें आधुनिक मछली बाजार, मछली उतारने के केंद्र और सितारगंज में एकीकृत एक्वापार्क शामिल हैं। राज्य सरकार ने 170 करोड़ रुपये के बजट वाली ट्राउट प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है। इसके तहत वर्ष 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 छोटे मछली बीज उत्पादन केंद्र और 600 कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

वैज्ञानिक प्रशिक्षण से किसानों को मदद
मुनस्यारी में ट्राउट पालन को बढ़ावा देने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भीमताल स्थित शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय की अहम भूमिका रही है। संस्थान मछली बीज उत्पादन, बीमारियों से बचाव और मछली पालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने में मदद कर रहा है।

ट्राउट पालन से पहाड़ी और सीमावर्ती गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार के अनुसार, यह गतिविधि स्थानीय जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और महाशीर जैसी संकटग्रस्त मछली प्रजातियों के संरक्षण में भी योगदान दे सकती है।

केंद्रीय मत्स्य विभाग के सचिव ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में ठंडे पानी की मत्स्यिकी आजीविका के नए साधन विकसित करने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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