विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Northeast Monsoon Active Chennai Flooded Heavy Rain Alert Issued In Several States Cloud Cover Prevailing Due

पूर्वोत्तर मानसून एक्टिव: चेन्नई हुई पानी-पानी... कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, इस कारण बसर रहे मेघ

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 18 Oct 2026 05:20 PM IST
सार

  • दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय, कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान।

  • चेन्नई के नुंगमबक्कम में 12 घंटे में 16 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

  • तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में मंगलवार को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका।

  • केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कई दिनों तक भारी बारिश हो सकती है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Image
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कई दिनों तक दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में मंगलवार को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं, अरब सागर में भी कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, हालांकि फिलहाल इसके भारत के पश्चिमी तट के मौसम पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

चेन्नई में 16 सेंटीमीटर बारिश दर्ज
मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार सुबह तक दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। तमिलनाडु में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। चेन्नई के नुंगमबक्कम में रविवार सुबह 5:30 बजे तक पिछले 12 घंटों में 16 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

तमिलनाडु के अडिरामपट्टिनम में 4 सेंटीमीटर और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके कवाली में 3 सेंटीमीटर बारिश हुई। तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे, कराईकल और टोंडी के अलावा आंध्र प्रदेश के काकीनाडा और रायलसीमा के तिरुपति में 2-2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

अगले कई दिनों तक भारी बारिश का अनुमान
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में रविवार और सोमवार को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। मंगलवार को बहुत भारी बारिश की आशंका है। इसके बाद बुधवार से लगातार तीन दिनों तक कुछ इलाकों में भारी बारिश होने का अनुमान है।

केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में रविवार से छह दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। लक्षद्वीप में मंगलवार से चार दिन और तटीय कर्नाटक में मंगलवार से तीन दिन तक भारी बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा में भी रविवार को भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से मिल रही नमी
दक्षिण भारत में बारिश बढ़ने की वजह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के आसपास सक्रिय मौसम प्रणालियां हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और दक्षिण आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के तटीय इलाकों के ऊपर ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इससे जुड़ी द्रोणिका बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से की ओर फैली हुई है।

इसके अलावा लक्षद्वीप के उत्तर में भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिण आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आसपास कई द्रोणिकाएं बनी हुई हैं। इनके कारण समुद्र से नमी वाली हवाएं दक्षिणी प्रायद्वीप के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रही हैं, जिससे बादल बन रहे हैं और बारिश हो रही है।

अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना
मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की जानकारी दी है। यह केरल के तट से 2,000 किलोमीटर से अधिक दूर है। इसके निचले वायुमंडलीय स्तरों तक पहुंचने और सोमवार तक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है।

हालांकि, इसकी मौजूदा दूरी को देखते हुए भारत के पश्चिमी तट पर इसका तत्काल प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है। मौसम की आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि यह प्रणाली किस दिशा में आगे बढ़ती है और कितनी मजबूत होती है।

मानसून को मजबूत कर सकता है MJO
पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियों पर मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का भी असर पड़ सकता है। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बादलों और बारिश से जुड़ी एक बड़ी मौसमी गतिविधि है, जो पूर्व की ओर बढ़ती है। यह वातावरण में नमी और हवा के ऊपर उठने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे कम दबाव के क्षेत्र और अन्य मौसमी प्रणालियों के बनने में मदद मिल सकती है।

यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ECMWF) ने हिंद महासागर के ऊपर MJO की मजबूत गतिविधि के संकेत दिए हैं। इससे पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता बढ़ने की संभावना पर नजर रखी जा रही है।

हिंद महासागर की स्थिति भी अहम
भूमध्यरेखीय अफ्रीका और हिंद महासागर के आसपास सितंबर की शुरुआत से व्यापारिक हवाओं के मजबूत होने के संकेत मिले हैं। इससे सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (Positive IOD) विकसित होने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति समुद्र और वातावरण के बीच नमी के आदान-प्रदान तथा बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकती है।

दूसरी ओर, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। अल नीनो, हिंद महासागर द्विध्रुव और MJO का संयुक्त प्रभाव आने वाले हफ्तों में दक्षिण भारत के मौसम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इन मौसमी संकेतों के आधार पर यह तय नहीं कहा जा सकता कि हर जिले में अच्छी बारिश होगी। अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर के अनुमान के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह और नवंबर की शुरुआत तक मौसम प्रणालियां सक्रिय रह सकती हैं।

किसानों के लिए बारिश का वितरण अहम
दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता से मिट्टी में नमी बढ़ने और तालाबों व जलाशयों में पानी जमा होने की उम्मीद है। इससे खेती और जल उपलब्धता को मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि बारिश कितनी नियमित और समान रूप से होती है।

अगर कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है, तो खेतों में जलभराव, खड़ी फसलों को नुकसान और बाढ़ जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में सिर्फ बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसके क्षेत्रवार वितरण पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन