देश के कई हिस्सों में गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर छोटे-बड़े किसान प्रदर्शनों हुए, जिसके बाद केंद्र सरकार ने हाल ही में रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित करने का एलान किया। यह समिति गन्ने और चीनी की कीमतों से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करेगी।
केवल नौकरशाहों को जगह मिली, रमेश चंद्र के विचारों पर चिंता
अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार के इस कदम का स्वागत तो किया, लेकिन समिति में शामिल लोगों पर सवाल भी उठाए। संगठन का कहना है कि इस समिति में केवल नौकरशाह हैं, जबकि किसान संगठनों या गन्ना उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधियों को इसमें जगह नहीं दी गई। संगठन का आरोप है कि समिति के अध्यक्ष बने रमेश चंद्र पहले कृषि कानूनों का समर्थन और एमएसपी पर कानूनी गारंटी न देने वाले रुख रख चुके हैं, जिस पर संगठन ने चिंता जताई।
30 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने की मांग
AIKS ने समिति को 30 दिनों के अंदर रिपोर्ट पेश करने और सिफारिशों को मौजूदा पेराई सत्र से लागू करने की मांग की है। बता दें कि यह संगठन गन्ने के न्यूनतम कानूनी मूल्य को 575 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा संगठन ने खरीफ और रकबी फसलों के लिए सी2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर फसलों की एमएसपी तय करने का आग्रह किया।
CACP के आकलन को गलत ठहराया
एमएसपी तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग अहम योगदान देता है। यह आयोग सरकार को फसलों की एमएसपी का सुझाव देता है। किसान सभा ने गन्ने की उत्पादन लागत के हिसाब को गलत बताया। संगठन का कहना है कि 2026-27 के लिए गन्ना का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन सी2 लागत 258 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 308 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए, जिसके आधार पर गन्ना किसानों को 575 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए।
एमएसपी में लागत की गणना कम
अपनी मांगों को आगे बढ़ाते हुए किसान सभा ने आरोप लगाया कि सीएसीपी द्वारा रबी और खरीफ फसलों के लिए घोषित एमएसपी किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत से कम है। संगठन ने दावा किया कि रबी सीजन 2027-28 के लिए सीएसीपी की सी2 लागत के अनुसार गेहूं का मूल्य 2,774 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए, जबकि घोषित मूल्य 2,610 रुपये ही है। इसी तरह चने के मूल्य में भी बड़ा अंतर है।
राज्यों पर संगठन का बड़ा आरोप
किसान सभा ने राज्यों पर भी उत्पादन लागत के गलत आंकड़े देने का आरोप लगाया है। संगठन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने गन्ने की लागत में प्रति हेक्टेयर उत्पादन का बढ़ा हुआ अनुमान दिखाया है, जिससे लागत कम नजर आती है। साथ ही कई अन्य राज्यों द्वारा धान और गेहूं की उत्पादन लागत के कम अनुमान पेश करने का आरोप लगाया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिलकर मिलों, मंडियों और गांवों में अपना आंदोलन तेज करेंगे।