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उत्तर प्रदेश : सालों से जमीन के फेर में फंसे किसानों को राहत, 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 28 Oct 2026 05:23 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी हुई। 12 से 18 साल से अटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

यूपी में चकबंदी प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार।
यूपी में चकबंदी प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया में फंसे किसानों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही कई अन्य गांवों में 12 से 18 साल से अटकी चकबंदी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और किसानों को इससे बाहर निकालने के लिए कदम उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों की जमीन से जुड़े विवाद कम करना, खेती को आसान बनाना और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाना है।

क्या है चकबंदी और किसानों को कैसे होगा फायदा?
चकबंदी में किसान के अलग-अलग स्थानों पर बिखरे खेतों को व्यवस्थित करके एक जगह या आसपास के भूखंडों में बदला जाता है। इससे खेती करना आसान हो सकता है और खेतों तक पहुंचने, सिंचाई करने तथा कृषि कार्यों में लगने वाला समय और खर्च कम हो सकता है।

चकबंदी पूरी होने से खेतों की सीमाओं को लेकर होने वाले विवाद भी कम करने में मदद मिल सकती है। इससे किसान अपनी जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और कृषि कार्यों की योजना आसानी से बना सकते हैं।

आठ जिलों के गांवों में पूरी हुई प्रक्रिया
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्नाव, बरेली, बुलंदशहर, बांदा, महराजगंज, चित्रकूट, बस्ती और प्रतापगढ़ के गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके अलावा, उन गांवों में भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं, जहां यह लंबे समय से रुकी हुई थी। चकबंदी की प्रक्रिया में देरी से किसानों को जमीन के इस्तेमाल और उससे जुड़े मामलों में परेशानी हो सकती है। ऐसे में लंबे समय से अटके मामलों को सुलझाने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

खेती की लागत घटाने और विवाद कम करने पर जोर
चकबंदी का मुख्य उद्देश्य खेतों को व्यवस्थित करना है, ताकि किसान सिंचाई, जुताई और दूसरी कृषि गतिविधियां आसानी से कर सकें। खेतों के छोटे-छोटे और दूर-दूर स्थित टुकड़ों के बजाय व्यवस्थित भूखंड मिलने से खेती के प्रबंधन में सुविधा हो सकती है।

सरकार की इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, कितने किसानों को सीधे लाभ मिला है और कितने गांवों में लंबित चकबंदी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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