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Hailstorm Destroys Crops In Haryana Farmers Demand Compensation Of Rs 1 Lakh Per Acre
हरियाणा में ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद : किसानों ने मांगा 1 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 28 Oct 2026 05:56 PM IST
सार
फतेहाबाद और रतिया में किसानों ने ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से धान की फसल को हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा। धान खरीद में नमी सीमा बढ़ाने की मांग भी उठाई।
हरियाणा के फतेहाबाद जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों का गुस्सा बढ़ गया है। मंगलवार को किसानों ने जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर जल्द मुआवजा देने की मांग की। किसानों ने नुकसान का विशेष सर्वे कराने और प्रभावित किसानों के बैंक खातों में सीधे 1 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा भेजने की मांग उठाई।
कई गांवों में फसलों को नुकसान, प्रशासन को ज्ञापन सौंपा
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश हसांगा के नेतृत्व में किसानों ने कहा कि बहबलपुर, भड़ोलावाली, सोट्टर भट्टू और थेरी समेत कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष मनदीप सिंह नथवान ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों को राहत देने के बजाय कागजी कार्रवाई पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द उचित सर्वे और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, तो 3 नवंबर को जिलेभर के किसान उपायुक्त कार्यालय का घेराव करेंगे।
रतिया में भी किसानों ने उठाई मुआवजे की मांग
फतेहाबाद जिले के रतिया में भी किसानों ने किसान विश्राम गृह में बैठक की। इसके बाद उन्होंने उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर ओलावृष्टि से प्रभावित धान की फसल का तुरंत सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की।
जिला अध्यक्ष निर्भय सिंह ने कहा कि धान की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है, लेकिन घटना के चार दिन बाद भी नुकसान का आकलन शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बुधवार तक सर्वे की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो किसान भाजपा नेताओं के घरों का घेराव करेंगे।
धान खरीद के नियमों में बदलाव की मांग
किसानों ने ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में धान खरीद के लिए नमी की अधिकतम सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत करने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि के कारण धान में नमी बढ़ सकती है, इसलिए खरीद के नियमों में राहत मिलनी चाहिए।
इसके अलावा किसानों ने प्रति एकड़ 28 क्विंटल धान खरीदने की सीमा हटाने और जिन किसानों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है, उनका पंजीकरण तुरंत बहाल करने की मांग भी की। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से पहले ही उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
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