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जल शक्ति मंत्री ने लॉन्च किया पुनर्भरण मोबाइल एप : कहां बनेगा भूजल रिचार्ज ढांचा? 3KM के दायरे में बताएगा जगह

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 28 Oct 2026 05:12 PM IST
सार

जल शक्ति मंत्री ने पुनर्भरण मोबाइल एप लॉन्च किया। एप तीन किलोमीटर तक के दायरे में भूजल रिचार्ज की संभावित जगहों की पहचान और वैज्ञानिक योजना बनाने में मदद करेगा।

जल शक्ति मंत्री ने लॉन्च किया पुनर्भरण मोबाइल एप
जल शक्ति मंत्री ने लॉन्च किया पुनर्भरण मोबाइल एप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश में भूजल का स्तर बढ़ाने और बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने की योजना बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘पुनर्भरण’ मोबाइल एप लॉन्च किया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने बुधवार को इस एप की शुरुआत की। इसे भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) ने राष्ट्रीय जल मिशन और जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया है।

इस एप की मदद से लोग अपने आसपास के उन संभावित स्थानों की पहचान कर सकेंगे, जहां भूजल बढ़ाने के लिए कृत्रिम पुनर्भरण की संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। एप तीन किलोमीटर तक के दायरे में ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त संरचना चुनने में मदद करेगा।

बारिश और जमीन की बनावट के आधार पर मिलेगी जानकारी
पुनर्भरण एप में भू-स्थानिक तकनीक और विभिन्न आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें बारिश की मात्रा, भूजल स्तर, जमीन में पानी समाने की क्षमता, ढलान और जल निकासी से जुड़ी जानकारी शामिल है। इन आंकड़ों के आधार पर संभावित पुनर्भरण क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किसी गांव या क्षेत्र में भूजल बढ़ाने के लिए किस तरह की संरचना बनाना अधिक उपयुक्त हो सकता है।

वेब पोर्टल पर भी मिलेगी गांव स्तर की जानकारी
मोबाइल एप के साथ वेब पोर्टल की सुविधा भी दी गई है। इस पोर्टल पर गांव स्तर के कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं से जुड़े नक्शे, जीआईएस टूल और अलग-अलग विषयों से संबंधित भौगोलिक जानकारी उपलब्ध होगी। इन सुविधाओं से भूजल प्रबंधन की योजना बनाने वाले विभागों और अन्य संबंधित लोगों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

भूजल प्रबंधन की वैज्ञानिक योजना बनाने में मिलेगी मदद
‘पुनर्भरण’ प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भूजल बढ़ाने के प्रयासों को वैज्ञानिक आंकड़ों से जोड़ना है। इसके जरिए संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जरूरत के अनुसार पुनर्भरण संरचनाओं की योजना बनाई जा सकेगी। इससे गांवों और दूसरे क्षेत्रों में भूजल संरक्षण की योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, भूजल स्तर पर इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सुझाए गए स्थानों पर किस तरह के काम किए जाते हैं और उनका क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहता है।
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