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यूपी में मौसम का कहर: तेज धूप के बाद अचानक छाया अंधेरा... आंधी-ओलों से खेतों में बिछीं धान-बाजरे की फसलें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 09 Oct 2026 04:29 PM IST
सार

  • शुक्रवार दोपहर पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में अचानक मौसम बदला।
  • मेरठ, एटा और कासगंज समेत कई जगह तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की सूचना।
  • एटा जिले के मारहरा क्षेत्र में करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई।
  • धान, बाजरा और सब्जियों की फसलों को नुकसान की आशंका।

यूपी में किसानों पर मौसम की मार
यूपी में किसानों पर मौसम की मार - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में शुक्रवार दोपहर मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदली कि तेज धूप के बीच आसमान काले बादलों से घिर गया। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बरेली, हापुड़, बुलंदशहर, एटा और कासगंज समेत कई इलाकों में तेज आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई। कई जगह सड़कें ओलों से पट गईं, पेड़ उखड़कर गिर गए और टिन शेड व होर्डिंग्स तक उड़ गए। सबसे ज्यादा चिंता किसानों की बढ़ी है। खेतों में खड़ी धान और बाजरे की पकती फसलों के तेज हवा से गिरने और बारिश-ओलों से नुकसान होने की आशंका है।

दोपहर में छाया अंधेरा, हेडलाइट जलाकर चले वाहन
शुक्रवार सुबह मौसम सामान्य था और तेज धूप निकली हुई थी। दोपहर करीब दो बजे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में अचानक काले बादल छा गए। कुछ ही देर में तेज हवाएं चलने लगीं और बारिश शुरू हो गई। कई इलाकों में मौसम इतना खराब हो गया कि दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा, जबकि कई लोग सड़क किनारे रुक गए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर समेत कई क्षेत्रों में मौसम बिगड़ने की खबरें सामने आईं। ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने की भी सूचना मिली। अचानक आए इस बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन तेज आंधी और ओलावृष्टि ने जनजीवन प्रभावित कर दिया।

एटा और कासगंज में ओलावृष्टि, यातायात प्रभावित
एटा में शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक तेज आंधी आई और झमाझम बारिश होने लगी। इसके साथ ही आसमान में अंधेरा छा गया और कई जगह भारी ओलावृष्टि हुई। खराब मौसम के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। चालकों को लाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े।

कासगंज में भी करीब साढ़े तीन बजे बारिश और तेज आंधी के साथ ओले गिरे। कई स्थानों पर पेड़ टूटकर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात बाधित हुआ। ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कई जगह सड़कों पर ओले बिछ गए। तेज हवा के कारण टिन शेड और होर्डिंग्स गिरने की भी सूचना मिली। स्थानीय स्तर पर हवा की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई।

मारहरा में एक घंटे तक तेज बारिश, खेतों में बिछीं फसलें
एटा जिले के मारहरा क्षेत्र में दोपहर तक तेज धूप थी, लेकिन बाद में आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद तेज आंधी के साथ करीब एक घंटे तक बारिश हुई। कई स्थानों पर ओले भी गिरे। तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले की बारिश के बाद जो फसलें गिरने से बच गई थीं, वे इस बार तेज हवा के चलते जमीन पर बिछ गईं। धान और बाजरे की फसलों को नुकसान की आशंका है। ओलावृष्टि से सब्जियों की फसलों पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है।

आंधी के कारण कई जगह पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए। घरों और दुकानों के टिन शेड उड़ने से भी नुकसान हुआ। बिजली व्यवस्था बाधित होने और बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनने की सूचना है।

ओलों और तेज हवाओं से किसानों की बढ़ी चिंता
धान और बाजरे की फसल इस समय कई इलाकों में खेतों में खड़ी है। ऐसे में तेज हवाओं से फसल गिरने और ओलावृष्टि से पौधों, पत्तियों तथा बालियों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। बारिश और ओले सब्जियों की फसलों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, नुकसान का वास्तविक आकलन मौसम साफ होने और खेतों का निरीक्षण किए जाने के बाद ही हो सकेगा। किसानों को सलाह है कि वे खेतों में फसल की स्थिति देखें और नुकसान होने पर तस्वीरों के साथ उसका रिकॉर्ड रखें। फसल बीमा कराने वाले किसान नुकसान की सूचना देने के लिए अपनी बीमा पॉलिसी और स्थानीय कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करें।

अगले 24 घंटे मौसम पर नजर रखने की जरूरत
मौसम में अचानक आए बदलाव के बीच अगले 24 घंटे के पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बादल छाने, बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, जिलेवार चेतावनी और बारिश की सटीक संभावना के लिए मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन की पुष्टि जरूरी है।

किसानों के लिए फिलहाल सबसे अहम है कि वे मौसम की जानकारी लेते रहें और तेज आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचें। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां फसलों का नुकसान सामने आने के बाद प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से आकलन किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
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