महिला किसान संगठित होकर कृषि व्यापार में कमाल कर रही है। मिर्जापुर के छानबे विकासखंड में 1,221 महिलाएं मिलकर छनवर एग्रो किसान उत्पादक संगठन चला रही हैं। यह संगठन खेती तक सीमित न रहकर कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री में भी हिस्सा लेता है। संगठन के इसी मॉडल को करीब से जानने के लिए बीते दिनों केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी मिर्जापुर पहुंचे। उन्होंने महिला किसानों की निर्णय लेने की क्षमता, बाजार से उनके जुड़ाव और ग्रामीण आजीविका से जुड़े नए प्रयोगों की जानकारी ली।
गेहूं-धान की खरीद-सप्लाई से जैविक खाद उत्पादन तक
संगठन की निदेशकों ने अधिकारियों को अपने व्यवसाय मॉडल की जानकारी दी। महिला निदेशकों के अनुसार, अब तक संगठन ने 25 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद और सप्लाई की है। बता दें कि यह संगठन साल 2022-23 में बनाया गया था। यह संगठन गेहूं के अलावा बीज, कीटनाशक, पशु आहार की खरीद बिक्री भी करता है। इसके अलावा कंपनी सदस्य महिला किसानों की उपज को इकट्ठा कर विपणन करने, कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि अवशेष प्रबंधन और जैविक खाद बनाने जैसे कई काम कर रही है।
हर सदस्य को लखपति दीदी बनाने का प्लान, 10 लाख के पार मुनाफा
इस कंपनी ने लगभग 1-.5 लाख रुपये का मुनाफा हासिल किया है। खास बात है कि यह मुनाफा कंपनी के परिचालन लागत से ज्यादा है। महिला निदेशकों ने अधिकारियों को बताया कि कंपनी हर महिला सदस्य को लखपति दीदी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। महिलाओं का संगठित होकर काम करना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मजबूत मॉडल बन सकता है।
विंध्य मार्ट से स्थानीय उत्पादों को मिला नया बाजार
अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने जिलाधिकारी के साथ मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में स्वयं सहायता समूहों द्वारा चलाए जा रहे विंध्य मार्ट का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां काम कर रही स्थानीय महिला उद्यमियों से बातचीत की और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। इस दौरान मिर्जापुर में वन प्रिया योजना को बढ़ाने, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और जलवायु अनुकूल ग्रामीण विकास के मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
क्या है 'विंध्य धाम प्रसादम बॉक्स' में खास?
विंध्य मार्ट के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां मिलने वाले विंध्य धाम प्रसादम बॉक्स में कई तरह की स्थानीय सामग्रियां उपलब्ध रहती हैं। इनमें पूजा सामग्री और फूल माला, माता की चुनरी और बनारसी साड़ी, लाल पेड़ा, विभिन्न प्रकार के अचार और मुरब्बा, कालीन से बनी सामग्री, धूप-अगरबत्ती, बम्बू (बांस) आइटम्स और मिक्स मेवा और मिट्टी का दीया शामिल है।