उत्तर प्रदेश में आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वहीं, चार जिलों के छह गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है, जहां कई सालों से काम रुका हुआ था। इसके अलावा, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।
आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
चकबंदी विभाग के अनुसार, आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई है। इसके अलावा बस्ती के औराडीहा और प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई।
छह गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने के कदम उठाए हैं। इनमें उन्नाव के अजगवां और पिडना, सादाबाद तथा बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं। इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात साल और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो साल से प्रक्रिया लंबित थी।
विभाग के अनुसार, इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत काम होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने और औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने जैसी वजहों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाई आ रही थी। इसके अलावा गुटबंदी और दलगत विवाद भी बाधा बने हुए थे। विशेष प्रयासों के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ने के कारण इन गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया।
15 अक्टूबर से उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का विशेष अभियान
चकबंदी आयुक्त ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत इन मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।
अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र देना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जिले में लंबित नहीं है। अभियान के बाद भी तय समयसीमा से अधिक अवधि तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन साल से पुराने वादों का प्राथमिकता से निस्तारण
चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस काम में तेजी लाने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।