खेती और पशुपालन के दम पर बिहार के शिवहर जिले के गोसाईपुर गांव में रहने वाली सुमित्रा देवी ने अपने साथ 200 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। पहले मात्र एक बीघा जमीन पर पारंपरिक खेती कर घाटा सहने वाली सुमित्रा के जीवन में यह बदलाव साल 2023 में सहारा ग्राम संगठन से जुड़ने का बाद आया।
समूह से ऋण लेकर बढ़ाई खेती
सुमित्रा देवी ने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए शुरुआत में जीविका समूह से 1 लाख रुपये का ऋण लिया था। इस रकम में से 35 हजार रुपये उन्होंने सब्जी की खेती में लगाए और बाकी बचे पैसों से एक गाय खरीद ली। इस शुरुआत के बाद उन्होंने लीज पर जमीन लेकर अपनी खेती का दायरा एक बीघे से बढ़ाकर छह बीघे तक कर लिया।
वर्तमान में वह दो बीघे खेत में बैंगन, कद्दू, नेनुआ, कोहड़ा, कुंदरू, धनिया, गोभी, मिर्च और खीरा जैसी विभिन्न सब्जियां उगा रही हैं। अपनी इस कड़ी मेहनत और बचत के दम पर उन्होंने आठ कट्ठा खुद की स्थायी जमीन भी खरीद ली है।
पशुपालन और खेती से 200 लोगों को मिला काम
सब्जी उत्पादन के साथ-साथ सुमित्रा देवी ने पशुपालन के क्षेत्र में भी काफी उन्नति की है। आज उनके पास कुल 10 गाय और भैंस हैं, जिनकी देखभाल और दूध के कारोबार से 30 लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है। दूध बेचकर जो कमाई हुई, उससे उन्होंने बकरियां खरीदीं और अब बड़े पैमाने पर बकरी पालन भी कर रही हैं। बकरी की खरीद-बिक्री के काम में भी 30 लोग रोजगार पा रहे हैं।
इसके अलावा, खेतों में सब्जी उगाने के काम में 50 से अधिक महिलाओं को और उपजी हुई सब्जियों को बाजार तक ले जाकर बेचने के काम में 70 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
ट्रेनिंग से सीखा नया तरीका, अब घर बैठे आते हैं खरीदार
एक वक्त था जब सुमित्रा देवी केवल पुराने तरीके से खेती करती थीं, जिसमें उन्हें अक्सर नुकसान उठाना पड़ता था और घर का खर्च चलाना मुश्किल था। साल 2016 में उन्होंने इस घाटे से बाहर निकलने की ठानी। इसके बाद वर्ष 2020 से उन्होंने कृषि विभाग द्वारा चलाए गए अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और खेती में नए प्रयोग किए।
त्योहारी सीजन में सब्जियों से रोजाना 10 हजार की कमाई
कृषि विभाग के प्रशिक्षण का ही नतीजा है कि आज सब्जी के थोक खरीदार खुद उनके खेत तक पहुंचते हैं। आमतौर पर वह सब्जी बेचकर रोजाना 4,000 रुपये कमा लेती हैं, जबकि त्योहारी सीजन में यह कमाई 10,000 रुपये रोजाना तक पहुंच जाती है। अपनी इस सफलता के बाद अब वह गांव की अन्य महिलाओं को भी खेती के नए गुर सिखा रही हैं।