गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ ने शरदकालीन बुवाई के लिए गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान सेवरही (कुशीनगर) से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 9 जिलों के लिए 5,400 क्विंटल उन्नत गन्ना बीज का आवंटन किया है। यह आवंटन गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी में सुधार लाने के उद्देश्य से 7 नई और उन्नतशील प्रजातियों के तहत किया गया है।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता ने 'प्रयोगशाला से खेत तक' कार्यक्रम के तहत शोध प्रक्षेत्र का भ्रमण करने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने में उन्नत प्रजातियों की सबसे अहम भूमिका होती है। प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 45 जिलों में गन्ने की खेती की जाती है, जहां वर्तमान में गन्ने की औसत उपज 825 कुंतल प्रति हेक्टेयर है।
जिलों को इस तरह मिला बीज का कोटा
कुल 5,400 कुंतल आवंटित बीज में से जिलों को उनकी जरूरत के अनुसार कोटा जारी किया गया है, जैसे महराजगंज को 1,210 क्विंटल, गोरखपुर को 1,120 क्विंटल, बस्ती 940 क्विंटल, आजमगढ़ 700 क्विंटल, कुशीनगर 520 क्विंटल, देवरिया 445 क्विंटल, मऊ 315 क्विंटल, सिद्धार्थनगर 100 क्विंटल और बलिया 50 क्विंटल।
7 प्रजातियां शामिल, को से 17451 के 70 लाख सिंगल बड जारी
गन्ना शोध संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुभाष सिंह के अनुसार, किसानों को 7 उन्नत प्रजातियां आवंटित की गई हैं। इनमें चार शीघ्र पकने वाली किस्मों- को.शा. 17431, 13235, यू पी 05125 और कोलख- 14201 शामिल हैं। वहीं, तीन मध्य-देर से पकने वाली प्रजातियों में को.शा 9232, को.शा 10239 और कोसे- 8452 दी जा रही हैं।
डॉ. सुभाष सिंह ने बताया कि संस्थान द्वारा तैयार की गई प्रजाति कोसे 17451 किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसका गन्ना मोटा होता है और इसकी पेड़ी की फसल भी बहुत अच्छी होती है। पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता के अनुसार, इस विशेष प्रजाति को पूर्वी उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में किसानों के खेतों तक तेजी से पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए 70 लाख सिंगल बड (एक आंख का बीज) का आवंटन किया गया है।
बारिश से बुवाई प्रभावित, अधिकारियों को शीघ्र उठान के निर्देश
क्षेत्र में पिछले चार दिनों से लगातार हुई असमय मूसलाधार बारिश के चलते शरदकालीन गन्ने की बुवाई प्रभावित हुई है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालात को देखते हुए उप गन्ना आयुक्त (देवरिया) ए.पी. सिंह ने गन्ना विकास विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आवंटित कोटे के अनुसार बीज का जल्द उठान और बुवाई का काम सुनिश्चित कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बसंतकालीन बुवाई के मुकाबले शरद काल में बोए गए गन्ने की औसत उपज और चीनी रिकवरी दोनों ही काफी बेहतर मिलती हैं।