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India-EU FTA: किसानों के लिए बड़ी खबर, कृषि व्यापार में बड़े बदलाव के आसार नहीं, तकनीक और बीज पर बढ़ेगा सहयोग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 29 Sep 2026 10:57 AM IST
सार

  • नीदरलैंड के मंत्री ने संभावना जताई है कि भारत और यूरोप के बीच हुए व्यापार समझौता से प्राथमिक कृषि उत्पादों के व्यापार में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है
  • यह बात भारतीय किसानों के लिए काफी मायने रखती है, क्योंकि प्राथमिक कृषि उत्पादों का भारत आना घरेलू कृषि उत्पादों के भाव पर दबाव डाल सकता है
  • मंत्री का कहना है कि यह समझौता डेयरी, बागवानी और तकनीक के मोर्चे पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग बढ़ा सकता है।
  • दोनों देश कम पानी और बदलते मौसम में बेहतर उत्पादन देने वाले जलवायु-अनुकूल बीजों पर काम कर रहे हैं।
  • भारत और नीदरलैंड्स 22 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनमें 10 केंद्र चालू और 5 निर्माणाधीन बताए गए हैं।

खेती में बढ़ रहा है स्मार्ट तकनीक का उपयोग।
खेती में बढ़ रहा है स्मार्ट तकनीक का उपयोग। - फोटो : स्टॉक
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से प्राथमिक कृषि उत्पादों (अनाज-दूध आदि कच्चे उत्पाद ) के व्यापार में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। लेकिन, यह समझौता कृषि उपकरण, तकनीक और तकनीकी जानकारी के क्षेत्र में भारत और यूरोपीय संघ के देशों के बीच सहयोग बढ़ा सकता है। यह संभावना नीदरलैंड के खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन और बागवानी मंत्री सिल्वियो एर्केंस ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में जताई।

भारतीय किसानों के लिए राहत की बात 
यह संभावना भारतीय किसानों के लिए राहत की तरह देखी जा सकती है। एक तरफ कृषि उत्पादों के व्यापार में कोई बड़ा बदलाव न होने से भारतीय किसानों को यूरोपीय उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी होगी। वहीं, तकनीक में सहयोग पैदावार बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।

नीदरलैंड के मंत्री एर्केंस का कहना है कि समझौते से प्राथमिक कृषि उत्पादों का व्यापार बहुत ज्यादा नहीं बदलेगा। लेकिन खेती में इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक उपकरण, तकनीकी जानकारी और प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग के लिए बेहतर आधार तैयार हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने में तकनीक पर जोर
नीदरलैंड के मंत्री ने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग किसानों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। उन्होंने मिट्टी की निगरानी, एआई आधारित कृषि अनुप्रयोगों और बदलते मौसम के अनुकूल बीजों को सहयोग के संभावित क्षेत्रों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि नवाचार के बिना जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की आय और भारत-नीदरलैंड कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर हर साल अधिक असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, तकनीकी सहयोग से दोनों देशों के लिए कारोबारी अवसर भी बन सकते हैं।

डेयरी, बागवानी और बीज पर सहयोग
नीदरलैंड के मंत्री ने भारतीय सरकारी अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं में डेयरी, बागवानी और बीज को प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड डेयरी फार्मिंग में अपनी विशेषज्ञता साझा करना चाहता है और भारत से भी सीखना चाहता है। उन्होंने बताया कि नीदरलैंड ने मवेशियों और डेयरी फार्मिंग में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को उत्पादकता पर असर डाले बिना काफी कम किया है। इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच जानकारी साझा करने की संभावना है।

भारत और नीदरलैंड बेंगलुरु में डेयरी क्षेत्र से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर भी काम कर रहे हैं। इसमें डच किसानों के भारतीय डेयरी किसानों को उत्पादकता बढ़ाने के तरीकों पर प्रशिक्षण देने की उम्मीद है। बीज क्षेत्र में सहयोग के तहत ऐसी किस्मों के विकास पर ध्यान दिया जा सकता है, जिन्हें कम पानी में उगाया जा सके और बदलते मौसम में भी इस्तेमाल किया जा सके।

22 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम
एर्केंस ने बताया कि भारत और नीदरलैंड बीज और फूलों के क्षेत्र में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को लेकर काम कर रहे हैं।  इनमें 10 सेंटर पहले से चालू हैं, पांच का निर्माण हो रहा है और पांच सेंटर मंजूरी के करीब हैं। एर्केंस के अनुसार, नीदरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत का बड़ा कृषि क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक हैं।

भारत और यूरोपीय संघ ने इस साल जनवरी में एफटीए के लिए बातचीत पूरी की थी। हालांकि, समझौता अभी लागू नहीं हुआ है। भारत और यूरोपीय आयोग ने कहा है कि समझौते में संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के लिए सुरक्षा बनाए रखी जाएगी, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में सीमित बाजार पहुंच दी जाएगी। एर्केंस 27 सितंबर से 2 अक्तूबर तक भारत के दौरे पर हैं। वह मुंबई में कारोबारियों, महाराष्ट्र सरकार और बीज क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद बुधवार को 18 डच कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बेंगलुरु जाएंगे और बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोगों से मुलाकात करेंगे।
 
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