मुर्गी फार्मों पर अज्ञात बीमारी का कहर : 50 हजार मुर्गियों की मौत से किसानों में हड़कंप, लाखों रुपये का नुकसान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 06 Nov 2026 03:49 PM IST
सार
तमिलनाडु के कुड्डालोर में अज्ञात बीमारी से हजारों मुर्गियों की मौत हुई है। किसान 50 हजार मौतों का दावा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का आंकड़ा 26 हजार है। पहली जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई।
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में मुर्गी फार्म चलाने वाले किसान इन दिनों बड़ी मुश्किल का सामना कर रहे हैं। जिले के कई गांवों में एक अज्ञात बीमारी फैलने से पिछले छह दिनों में करीब 50 हजार मुर्गियों की मौत होने की खबर है। बीमारी के कारण मुर्गियों के मरने का सिलसिला जारी है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिवाली से ठीक पहले बीमारी फैलने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि त्योहार के दौरान मुर्गियों की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है।
एक किसान की 7 हजार मुर्गियां मरीं
कुड्डालोर जिले के किसान मोहन भी इस बीमारी की चपेट में आए हैं। पिछले एक सप्ताह में उनके फार्म की करीब 7 हजार मुर्गियां मर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मुर्गी पालन में उन्होंने 40 से 50 लाख रुपये तक का निवेश किया था, लेकिन बीमारी ने उनकी मेहनत और कमाई पर पानी फेर दिया है।
मोहन के मुताबिक, एक चूजे की कीमत करीब 47 से 48 रुपये है, जबकि 50 किलो मुर्गी दाने के कट्टे के लिए 2,500 से 2,600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा बिजली का बिल भी हर महीने 10 हजार से 20 हजार रुपये तक आता है। ऐसे में मुर्गियों की मौत से किसानों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
मुर्गियों की मौत के बाद बड़े पैमाने पर निपटान
किसानों के मुताबिक, बीमारी से मरने वाली मुर्गियों के पैर पीछे की ओर फैले हुए और पंख पूरी तरह खुले मिल रहे हैं। बीमारी की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। इससे किसानों को आशंका है कि उनके फार्म में बची मुर्गियां भी इसकी चपेट में आ सकती हैं।
बीमारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में मुर्गियों को मारकर नष्ट किया जा रहा है। मृत मुर्गियों को जमीन में दफनाया जा रहा है। हालांकि, बीमारी की पहचान नहीं होने से किसानों में डर बना हुआ है।
जिला प्रशासन के आंकड़े किसानों से अलग
मुर्गियों की मौत को लेकर किसानों और जिला प्रशासन के आंकड़ों में अंतर है। किसानों का दावा है कि पिछले छह दिनों में करीब 50 हजार मुर्गियों की मौत हुई है, जबकि जिला प्रशासन के मुताबिक यह संख्या लगभग 26 हजार है। जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि प्रयोगशाला में हुई पहली जांच में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, मुर्गियों की मौत की असली वजह अभी पता नहीं चल पाई है।
भोपाल की लैब में भेजे गए नए नमूने
तमिलनाडु सरकार ने बीमारी की वजह का पता लगाने के लिए मुर्गियों के अतिरिक्त नमूने भोपाल की प्रयोगशाला में भेजे हैं। किसानों को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की पहचान होगी और उसे फैलने से रोकने के उपाय किए जा सकेंगे।
किसान मोहन का कहना है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों और पशु चिकित्सकों से कई बार मदद मांगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस राहत नहीं मिली है। अधिकारियों की ओर से उन्हें जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।
दिवाली से पहले कारोबार पर संकट
दिवाली के आसपास मुर्गियों की मांग बढ़ने से किसानों को कारोबार में अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन बीमारी फैलने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। किसानों को डर है कि अगर जल्द बीमारी पर काबू नहीं पाया गया तो फार्म में बची मुर्गियां भी मर सकती हैं। इससे उन्हें हुए नुकसान की भरपाई करना और मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल किसानों की सबसे बड़ी चिंता बीमारी की वजह जानने, बची हुई मुर्गियों को सुरक्षित रखने और आर्थिक नुकसान से उबरने की है।
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