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किसानों पर ही दोष मढ़ना ठीक नहीं... : दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर SC सख्त, CJI ने पराली को लेकर दिए ये सुझाव

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 06 Nov 2026 02:45 PM IST
सार

दिल्ली-NCR प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से पराली खरीदने और उसकी कीमत पहले तय करने का सुझाव दिया। जानें CJI सूर्यकांत ने प्रदूषण रोकने के लिए और क्या उपाय बताए।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सरकार को किसानों के सामने इसका आर्थिक विकल्प रखना होगा। इसके लिए पराली की कीमत पहले से तय कर किसानों से खरीदने और उसके भंडारण की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसानों को पराली से कमाई का रास्ता दिखेगा तो वे उसे जलाने के बजाय बेचने या सुरक्षित रखने में रुचि दिखा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की कमी पर भी सवाल उठाए। केंद्र सरकार ने बताया कि इस साल पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है और सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठा रही है।

किसानों को पराली से कमाई का मौका दे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि पराली की समस्या का समाधान केवल किसानों को जागरूक करने या उन्हें रोकने से नहीं होगा। इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे बचाने में आर्थिक फायदा दिखाई दे।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकारी एजेंसियां और नगर निगम किसानों से पराली खरीदकर उसके भंडारण की व्यवस्था कर सकते हैं। इसके लिए वेयरहाउस भी बनाए जा सकते हैं। इससे किसानों को पराली बेचकर आमदनी होगी और भंडारण का काम करने वाले लोगों को भी रोजगार मिल सकता है।

CJI ने कहा कि पराली खरीदने की कीमत पहले ही तय और अधिसूचित होनी चाहिए, ताकि किसानों को पता रहे कि उन्हें अपनी पराली का कितना पैसा मिलेगा। इससे वे फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे बेचने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।

ग्राम पंचायतों को दी जाएं पराली प्रबंधन की मशीनें
सुप्रीम कोर्ट ने पराली प्रबंधन के लिए मशीनों की उपलब्धता पर भी जोर दिया। CJI ने कहा कि महंगी मशीनें व्यक्तिगत किसानों के लिए खरीदना और उनका खर्च उठाना आसान नहीं है। इसलिए ऐसी मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि गांव के सभी किसान उनका इस्तेमाल कर सकें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पराली के आर्थिक महत्व और उसके इस्तेमाल के बारे में किसानों को जागरूक करना जरूरी है। जब किसानों को इसके फायदे समझ आएंगे, तो वे पराली को जलाने के बजाय सुरक्षित रखने या बेचने में रुचि दिखाएंगे। हालांकि, इस बदलाव में समय लग सकता है और शुरुआत में कुछ किसान इसके लिए तैयार नहीं होंगे।

प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली जिम्मेदार नहीं, वाहनों पर भी उठाए सवाल
CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या को केवल पराली जलाने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसके लिए वाहनों से निकलने वाला धुआं, ट्रैफिक जाम, ऊर्जा और कचरा प्रबंधन जैसे दूसरे कारण भी जिम्मेदार हैं।

उन्होंने दिल्ली को NCR से जोड़ने वाली सड़कों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक और जाम की स्थिति पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

CJI ने सवाल उठाया कि क्या प्रदूषण के लिए केवल किसान जिम्मेदार हैं या फिर अमीर वर्ग के निजी वाहनों से निकलने वाला धुआं भी इसकी बड़ी वजह है? उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए सभी कारणों पर एक साथ काम करना होगा।

केंद्र सरकार ने बताया, इस साल पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि इस साल पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। हरियाणा में विशेष रूप से इसमें बड़ी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की योजना भी शुरू की है।

ASG ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पराली खरीदने और किसानों को प्रोत्साहन देने से जुड़े सुझाव कृषि मंत्रालय के सामने रखे जाएंगे। केंद्र सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर एक नोट भी पेश किया, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।

सरकार ने यह भी बताया कि डीजल से चलने वाले रिक्शों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा दूसरे शहरों से दिल्ली आने वाली बसों के लिए नियम अनिवार्य करने और प्रदूषण नियंत्रण के तात्कालिक व मध्यम अवधि के उपायों पर भी काम किया जा रहा है।

टोल और दिल्ली बॉर्डर पर खड़े वाहनों से भी बढ़ रहा प्रदूषण
सुनवाई के दौरान कोर्ट की सहायता कर रहीं अमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने प्रदूषण बढ़ने की एक और वजह बताई। उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों को लंबे समय तक खड़े रहने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले भी आदेश दे चुका है, लेकिन इसका पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि NCR के कई वाहनों को दिल्ली की सीमाओं पर रोक दिया जाता है। ऐसे में वाहन लंबे समय तक इंजन चालू रखकर खड़े रहते हैं, जिससे धुआं निकलता रहता है और प्रदूषण बढ़ता है।
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