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झींगा किसानों पर बढ़ा लागत का बोझ : महंगे फीड ने बढ़ाई मुश्किलें, बाजार में दाम कमजोर, घट रहा मुनाफा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 06 Nov 2026 03:32 PM IST
सार

झींगा पालन की लागत बढ़ने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फीड 16 रुपये किलो तक महंगा हुआ। एक टन झींगा उत्पादन पर खर्च 2.8 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच गया है।

झींगा
झींगा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश में झींगा उत्पादन की कुल मात्रा में 3 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद किसानों की चिंता बढ़ गई है। झींगा मछलियों के लिए इस्तेमाल होने वाले फीड (आहार) की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इससे झींगा पालन की लागत बढ़ गई है और कई एक्वाकल्चर फार्म (जलीय जीव पालन केंद्रों) के लिए कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। किसानों को महंगे फीड पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जबकि बाजार में झींगे की कीमतों में खास सुधार नहीं हुआ है।

अल नीनो से महंगा हुआ झींगा फीड
ऑल इंडिया श्रिम्प हैचरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रविकुमार येल्लंकी के मुताबिक, झींगा फीड की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह अल नीनो का असर है। मौसम में बदलाव के कारण कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे फिशमील (मछली का चूरा), फिश ऑयल, सोयाबीन मील और फीड बनाने में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इनकी कीमतें बढ़ने से फीड बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ी है। हालांकि, कंपनियां कच्चे माल की बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं। इससे उनके मुनाफे पर भी दबाव पड़ रहा है।

बेमौसम बारिश और बैक्टीरिया ने बढ़ाई परेशानी
झींगा किसानों की मुश्किलें सिर्फ महंगे फीड तक सीमित नहीं हैं। बेमौसम बारिश और पानी का तापमान बढ़ने से विब्रियो (Vibrio) बैक्टीरिया का खतरा भी बढ़ा है। इससे झींगों की सेहत प्रभावित हो सकती है। साथ ही उनका भोजन पचाने और उसका सही इस्तेमाल करने की क्षमता, जीवित रहने की दर और उत्पादन पर भी असर पड़ता है।

रविकुमार येल्लंकी के मुताबिक, किसानों को अब झींगों के भोजन पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन बाजार में उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम नहीं मिल रहा। इससे किसानों का मुनाफा लगातार घट रहा है।

वैश्विक बाजार में ज्यादा आपूर्ति से झींगे के दाम कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में झींगे की अधिक आपूर्ति के कारण कीमतें दबाव में हैं। दुनिया के बड़े झींगा उत्पादक देशों में शामिल इक्वाडोर में जरूरत से ज्यादा उत्पादन होने से वैश्विक बाजार में झींगे की उपलब्धता बढ़ गई है। इससे भारत के झींगा निर्यातकों को भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, येल्लंकी के मुताबिक, अमेरिकी बाजार में भारतीय झींगे की मांग और पहुंच कुछ कम हुई है, लेकिन दूसरे देशों से मिल रही मांग के कारण निर्यात कारोबार ठीक बना हुआ है।

एक टन झींगा उत्पादन पर 2.8 लाख रुपये से ज्यादा खर्च
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, कच्चे माल और फिशमील की कीमतें बढ़ने से झींगा फीड के दाम में 10 से 16 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। अब इसकी कीमत ब्रांड और गुणवत्ता के हिसाब से करीब 1.20 लाख से 1.75 लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। वहीं, ब्लैक टाइगर झींगा के फीड की कीमत में 12 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद इसकी औसत कीमत 1.22 लाख रुपये प्रति टन से ज्यादा हो गई है।

किसानों को एक टन झींगा तैयार करने के लिए करीब 1.3 से 1.7 टन फीड की जरूरत पड़ती है। बीमारी से प्रभावित तालाबों में इसकी खपत और ज्यादा हो सकती है। ऐसे में एक टन झींगा उत्पादन की कुल लागत 2.8 लाख रुपये से ऊपर पहुंच रही है। फीड की बढ़ती कीमतों और झींगे के कमजोर बाजार भाव ने किसानों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है।
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