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Diwali 2026 Sweets Get More Expensive With Price Of Sugar And Dry Fruits Increasing Ruining Festival Budget
Diwali 2026: दिवाली पर महंगी हुई मिठाई, चीनी के से लेकर मेवे तक के बढ़ने से बिगड़ा त्योहार का बजट
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 06 Nov 2026 03:26 PM IST
सार
दिवाली 2026 पर मिठाई खरीदना महंगा हो गया है। चीनी के दाम 30%, खाद्य तेल 15% और किशमिश 10% बढ़ने से मिठाई कारोबारियों के साथ ग्राहकों की जेब पर भी असर पड़ा है।
दिवाली के मौके पर बाजारों में मिठाइयों की दुकानें सज गई हैं। घरों, दफ्तरों और दुकानों में मिठाई के डिब्बों की खरीदारी भी तेज हो गई है। लेकिन इस बार त्योहार की मिठास लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। चीनी, खाद्य तेल और सूखे मेवों के दाम बढ़ने से मिठाइयां महंगी हो गई हैं। इसका असर मिठाई की दुकानों से लेकर ग्राहकों की खरीदारी तक दिखाई दे रहा है।
सितंबर में चीनी की कीमत एक साल पहले के मुकाबले करीब 30 फीसदी बढ़ गई। मिठाइयां बनाने में इस्तेमाल होने वाले रिफाइंड खाद्य तेल के दाम में लगभग 15 फीसदी, किशमिश में 10 फीसदी और सूखे मेवों में करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन सभी चीजों की महंगाई देश की सामान्य महंगाई दर से कहीं ज्यादा है।
मिठाई की दुकानों पर भी बढ़ा लागत का दबाव
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली के पुराने बाजारों में मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ रही है। दुकानों के शीशे वाले काउंटर अलग-अलग तरह की मिठाइयों से भरे हैं। लेकिन इस बार मिठाई खरीदने के लिए ग्राहकों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
दिल्ली की मशहूर बंगाली स्वीट हाउस के मैनेजिंग पार्टनर वर्जेश अग्रवाल के मुताबिक, मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली लगभग सभी चीजों के दाम बढ़े हैं। इसका असर कारोबार पर पड़ा है। लागत बढ़ने के बावजूद उन्होंने मिठाइयों की कीमतों में 10 फीसदी से कम बढ़ोतरी की है। बंगाली स्वीट हाउस की शुरुआत 1937 में हुई थी।
देशभर में मिठाइयों की महंगाई दर 9 फीसदी से ज्यादा पहुंच गई है। भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतों का असर मिठाई बाजार पर भी पड़ रहा है।
सरकार ने चीनी की कीमतें काबू करने के लिए उठाए कदम
चीनी की घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने अगस्त में चीनी मिलों और रिफाइनरी कंपनियों को कच्ची चीनी का शुल्क मुक्त आयात करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा चीनी के थोक खरीदारों और कारोबारियों के पास चीनी रखने की मात्रा पर भी सीमा तय की गई।
सरकार ने चीनी मिलों से त्योहारों के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने की अपील की। साथ ही चीनी को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाई गई। इन कदमों से कुछ राहत मिली, लेकिन अल नीनो के असर से बारिश की कमी ने गन्ने की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे 2026-27 के चीनी उत्पादन सीजन पर असर पड़ने की आशंका है।
मिठाई कारोबारी खुद उठा रहे बढ़ी लागत का बोझ
मिठाई कारोबारियों के सामने इस बार मुश्किल स्थिति है। दिवाली उनके कारोबार का सबसे बड़ा बिक्री सीजन होता है। ऐसे में उनके सामने दो रास्ते हैं- बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालें या अपना मुनाफा कम करें। दिल्ली के हाउस ऑफ कलेवा के मैनेजर विजय शंकर अग्रवाल के मुताबिक, उनकी दुकान ने बढ़ी हुई लागत का ज्यादातर बोझ खुद उठाया है। उन्होंने मिठाइयों की कीमतों में करीब 3 फीसदी ही बढ़ोतरी की है।
ग्राहकों को भी महसूस हो रही महंगाई
मिठाइयों की बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिख रहा है। दिल्ली के बंगाली मार्केट स्थित नाथू स्वीट्स में अपनी मां के साथ मिठाई खरीदने पहुंचीं 25 वर्षीय पूजा रमेश ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में मिठाई के डिब्बों की कीमत 20 से 30 रुपये तक बढ़ गई है।
कुछ ग्राहकों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के साथ मिठाई के डिब्बों में सामान की मात्रा भी कम हुई है। दिल्ली के एक वकील तरुण जौहरी ने बताया कि उन्होंने दिवाली पर उपहार देने के लिए सूखे मेवों के 40 डिब्बे खरीदे। उनके मुताबिक, कुछ पैकेट में कीमत बढ़ने के बावजूद सामान की मात्रा कम कर दी गई है।
आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है महंगाई
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल की आखिरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.1 फीसदी तक पहुंच सकती है। सितंबर में यह 5.5 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई इससे भी ज्यादा रहने की आशंका है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, खाद्य महंगाई दर 8 फीसदी से ऊपर रह सकती है। ऐसे में त्योहारों के दौरान लोगों को महंगे खाद्य पदार्थों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में अगस्त से जनवरी तक चीनी की मांग आमतौर पर ज्यादा रहती है। ऐसे में त्योहारों का सीजन आगे बढ़ने के साथ मिठाइयों की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इस दिवाली मिठाई के डिब्बे खरीदने वाले लोगों को महंगाई का असर साफ महसूस हो रहा है।
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