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Maharashtra Sugarcane Farmers Agitation Ends Sugarcane Will Get Up To Rs 4200 Per Tonne
महाराष्ट्र : गन्ना किसानों का आंदोलन खत्म, 4200 रुपये प्रति टन तक मिलेगा गन्ने का दाम
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 06 Nov 2026 03:59 PM IST
सार
महाराष्ट्र में 61 घंटे बाद गन्ना किसानों का आंदोलन खत्म हुआ। नए समझौते के तहत किसानों को 4,200 रुपये प्रति टन तक भुगतान मिलेगा। जानें भुगतान का नया फॉर्मूला।
महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है। चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच गन्ने के भुगतान को लेकर सहमति बनने के बाद किसान संगठन स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने शुक्रवार तड़के अपना आंदोलन वापस ले लिया। नए समझौते के तहत किसानों को गन्ने के लिए अधिकतम 4,200 रुपये प्रति टन तक भुगतान किया जाएगा। इस समझौते के बाद मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे-48 पर 61 घंटे से ज्यादा समय से लगा जाम भी खत्म हो गया है और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो गया है।
कोल्हापुर में देर रात बनी सहमति
गन्ने के भुगतान को लेकर यह समझौता गुरुवार देर रात कोल्हापुर जिला कलेक्टर कार्यालय में हुई बैठक के दौरान हुआ। बैठक में मंत्री हसन मुश्रीफ, चीनी मिलों के प्रतिनिधि और राजू शेट्टी के नेतृत्व वाला स्वाभिमानी शेतकारी संगठन शामिल हुआ। संगठन के प्रमुख राजू शेट्टी ने पहले गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति टन की मांग की थी। हालांकि, बातचीत के बाद वह 4,200 रुपये प्रति टन के भुगतान पर सहमत हो गए।
तीन चरणों में होगा गन्ने का भुगतान
समझौते के मुताबिक, किसानों को शुरुआत में 3,900 रुपये प्रति टन का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद पेराई सीजन खत्म होने पर 100 रुपये प्रति टन दिए जाएंगे। बाकी 200 रुपये अगले पेराई सीजन से पहले मिलेंगे। हालांकि, यह अंतिम भुगतान चीनी की कीमत 45 रुपये प्रति किलो स्थिर रहने की शर्त पर किया जाएगा।
इसके अलावा, अगर चीनी की कीमत 45 रुपये प्रति किलो से ऊपर जाती है तो उससे होने वाली अतिरिक्त कमाई का 70 फीसदी हिस्सा किसानों को और 30 फीसदी हिस्सा चीनी मिल मालिकों को मिलेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चीनी की कीमत बढ़ने पर किसानों को भी उसका लाभ देना है।
61 घंटे बाद हाईवे पर यातायात बहाल
समझौता होने के बाद राजू शेट्टी ने शुक्रवार रात करीब 1 बजे किणी टोल प्लाजा और सतारा में आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। इसके साथ ही शुक्रवार को प्रस्तावित हड़ताल भी वापस ले ली गई।किसानों के आंदोलन के कारण मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे-48 पर पुणे, सतारा और कोल्हापुर के बीच यातायात प्रभावित था। आंदोलन खत्म होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो गई।
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