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भारत के विकास के मॉडल पर UNDP की मुहर : मनरेगा, आयुष्मान भारत, JAM-UPI ने दुनिया को दिखाया तरक्की का रास्ता

डॉ. उमाशंकर मिश्र , नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sun, 16 Nov 2025 02:39 PM IST
सार

मनरेगा, आयुष्मान भारत, जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी, UPI, आकांक्षी जिला कार्यक्रम और कोविन जैसी पहलों पर आधारित भारत के पिछड़े लोगों के विकास का मॉडल दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। UNDP ने भारत के सामाजिक कल्याण पर निवेश के फॉर्मूले को तेज विकास का आधार बताया है। 

भारत की सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की UNDP ने की तारीफ।
भारत की सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की UNDP ने की तारीफ। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारत आज दुनिया को यह दिखा रहा है कि तेज विकास केवल आर्थिक नीतियों से नहीं, बल्कि समाज के सबसे पिछड़े वर्गों पर किए गए सटीक और सोच-समझकर निवेश से भी संभव हो सकता है। तकनीक, सामाजिक सुरक्षा और सहभागी शासन के अनोखे मेल ने भारत को एक ऐसा मॉडल बना दिया है, जिसे UNDP ने “वैश्विक सबक” करार दिया है।

UNDP ने की भारत के विकास के मॉडल की तारीफ 

UNDP के कार्यवाहक प्रशासक हाओलियांग शू ने भारत के विकास के मॉडल की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक प्रगति और सामाजिक समावेशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत की विकास यात्रा सिर्फ जीडीपी बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि कमजोर व्यक्ति भी विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके।

UNDP ने कहा है कि भारत ने तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ चमकदार डिजिटल प्रदर्शन के लिए नहीं किया, बल्कि इसे उस स्तर पर पहुंचाया है, जहां गरीब परिवार, किसान, मजदूर, महिला या युवा - हर किसी को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। 

मनरेगा, आयुष्मान भारत, JAM-UPI से मिला फायदा 

शू ने कहा कि भारत का विकास मॉडल इसलिए अलग है, क्योंकि यहाँ नीतियां सिर्फ बनाई नहीं जातीं, बल्कि जनता की जिंदगी में उतरकर असर भी दिखाती हैं। मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को भरोसेमंद रोजगार दिया, जबकि आयुष्मान भारत ने लाखों लोगों को महंगे इलाज की चिंता से मुक्त किया।

जन धन-आधार-मोबाइल की JAM ट्रिनिटी और UPI जैसे डिजिटल टूल्स ने सीधा लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बना दिया। आज कई देश भारत की इस सफलता को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि भारत ने यह दिखाया है कि सरकारी सहायता बिना बिचौलियों के भी तेजी से लोगों तक पहुंच सकती है।

भारत की डिजिटल इंडिया पहल की दुनिया बनी मुरीद 

  • UPI से भुगतान: डिजिटल भुगतान को यूपीआई ने इतना सरल बना दिया कि यह दुनिया के सबसे तेज और भरोसेमंद भुगतान सिस्टम बन गया है।
  • कोविन प्लेटफॉर्म : कोविड महामारी के दौरान कोविन प्लेटफॉर्म ने दो अरब से ज्यादा वैक्सीन डोज को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक कर एक बेमिसाल काम किया।
  • यू-विन प्लेटफॉर्म : भारत का नया यू-विन प्लेटफॉर्म भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण की डिजिटल निगरानी निर्बाध रूप से संभव हो रही है।
यूएनडीपी का कहना है कि भारत के ये खुले डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं, लागत कम करते हैं और किसी एकाधिकार को जन्म नहीं लेने देते।

आकांक्षी जिला कार्यक्रम : डेटा - भागीदारी ने दिखाई दिशा

भारत के आकांक्षी जिला कार्यक्रम ने दिखाया कि जब डेटा, प्रमाण और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी मिलती है, तो सबसे पिछड़े जिले भी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। यह कार्यक्रम अब वैश्विक दक्षिण के लिए प्रेरणा बन रहा है। यूएनडीपी के अनुसार, यह कार्यक्रम भारत के सामाजिक परिवर्तन की असली तस्वीर दिखाता है - यहां बदलाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हर जिले में जमीन पर उतरता दिख रहा है।

हरित रोजगार और जलवायु-अनुकूल विकास की रणनीति 

भारत केवल तकनीक और सामाजिक सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि जलवायु-अनुकूल विकास में भी दुनिया के लिए रास्ता बना रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा, हरित रोज़गार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि विकास प्रकृति और भविष्य दोनों के साथ संतुलन में हो। 

यूएनडीपी का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का विकास मॉडल दुनिया के पिछड़े देशों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा, क्योंकि यहां विकास के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।

यूएनडीपी प्रमुख का साफ कहना है कि भारत ने दुनिया को यह सिखाया है कि तेज विकास सामाजिक न्याय, तकनीक और पारदर्शी शासन का संतुलन बनाकर ही संभव है। यही कारण है कि पिछड़े देशों के सहयोग के मंच पर भारत अब एक नेतृत्वकारी भूमिका में है और कई देश भारत से सीख लेकर अपने विकास के मॉडल को बदल रहे हैं।

भारत की कहानी आज वैश्विक मंच पर एक ऐसे देश के विकास की गाथा बन गई है, जो न सिर्फ अपने नागरिकों की परवाह करता है, बल्कि दुनिया को भी यह दिखा रहा है कि समान, समावेशी और टिकाऊ विकास कैसा होना चाहिए।
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