गंगा नदी के पानी में मिला एक वायरस मछलियों और इंसानों में संक्रमण फैलाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने में कारगर साबित हुआ है। इस वायरस को बैक्टीरियोफेज कहते हैं, जो केवल बैक्टीरिया को संक्रमित कर उन्हें नष्ट करता है। नई दिल्ली स्थित एम्स की वैज्ञानिक डॉ. पूजा सचदेवा ने मंगलवार को हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी साझा की। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बैक्टीरियोफेज की मदद से एरोमोनास हाइड्रोफिला बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज विकसित करने की संभावना है। फिलहाल इस पर आगे के परीक्षण किए जा रहे हैं।
तालाब और नदियों में पाया जाता है खतरनाक बैक्टीरिया
डॉ. पूजा सचदेवा के अनुसार, एरोमोनास हाइड्रोफिला नाम का बैक्टीरिया तालाबों, नदियों और दूषित पानी में पाया जाता है। यह इंसानों और मछलियों दोनों में संक्रमण फैलाता है।
इंसानों में इसके संक्रमण से डायरिया, उल्टी, पेट में ऐंठन, बुखार और त्वचा व कोमल ऊतकों में संक्रमण हो सकता है। वहीं, मछलियों में यह मोटाइल एरोमोनास सेप्टीसीमिया नाम की गंभीर बीमारी फैलाता है। इसे हेमोरैजिक सेप्टीसीमिया, त्वचा के अल्सर, ड्रॉप्सी और लाल घाव रोग के नाम से भी जाना जाता है।
इस बैक्टीरिया को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि इस पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का असर लगातार कम हो रहा है। ऐसे में इसके संक्रमण से निपटने के लिए इलाज के दूसरे विकल्पों पर शोध किया जा रहा है।
गंगा के पानी में मिले बैक्टीरियोफेज से इलाज की उम्मीद
शोध में गंगा नदी के पानी में एक विशेष बैक्टीरियोफेज मिला है, जो एरोमोनास हाइड्रोफिला बैक्टीरिया को खत्म करने में कारगर पाया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह वायरस केवल बैक्टीरिया को निशाना बनाता है और इंसानी शरीर की कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
डॉ. रक्षा चौधरी, डॉ. तुन सागर और डॉ. निशा राठौड़ के मार्गदर्शन में इस पर आगे के परीक्षण किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि परीक्षण सफल रहने पर इस शोध के आधार पर मछलियों और इंसानों के लिए टीका विकसित किया जा सकेगा। हालांकि, अभी इस दिशा में परीक्षण जारी हैं। इसे इलाज या टीके के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना परीक्षणों के नतीजों पर निर्भर करेगी।
अस्पतालों में फैलने वाले संक्रमण पर भी शोध
डॉ. पूजा सचदेवा ने बताया कि एम्स में अस्पतालों के अंदर मरीजों को संक्रमित करने वाले खतरनाक जीवाणुओं के इलाज पर भी शोध चल रहा है।
अस्पतालों में ईएसकेएपीई नाम के छह खतरनाक जीवाणुओं का समूह मरीजों में संक्रमण फैलाता है। इन जीवाणुओं पर भी एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो चुका है। वैज्ञानिक बैक्टीरियोफेज थेरेपी के जरिए इन संक्रमणों का इलाज खोजने में जुटे हैं।
क्या है बैक्टीरियोफेज थेरेपी?
बैक्टीरियोफेज एक प्रकार के वायरस होते हैं, जो केवल बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं। इसी प्रक्रिया के आधार पर बैक्टीरियोफेज थेरेपी विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
इस शोध में वैज्ञानिक ऐसे वायरस की मदद से उन बैक्टीरिया को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाएं कम असर कर रही हैं। गंगा के पानी में मिले बैक्टीरियोफेज पर चल रहा शोध भी इसी दिशा में एक प्रयास है। फिलहाल इसके इस्तेमाल से इलाज और टीका विकसित करने के लिए आगे के परीक्षण किए जा रहे हैं।