लखनऊ के भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में खेत बचाओ अभियान के तहत मंगलवार को एक किसान चौपाल का आयोजन किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस चौपाल में किसानों से सीधा संवाद किया।
चावल उत्पादन में भारत नंबर वन
किसानों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि देश में अनाज के भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत अब चावल के उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया में पहले स्थान पर आ गया है।
374 ग्रामीण सड़कों के निर्माण और तिल-मूंगफली की खरीद को मंजूरी
खेती के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए अच्छी सड़कें बहुत जरूरी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 374 नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी है। इसके लिए 544 करोड़ 62 लाख रुपये का बजट पास किया गया है। इसके अलावा, राज्य के किसानों के फायदे के लिए सरकार ने तिल और मूंगफली की सरकारी खरीद को भी स्वीकृति दे दी है।
मिट्टी की जांच कराएं, रसायनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें
कृषि मंत्री ने किसानों से रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रसायनों के इस्तेमाल से धरती की सेहत बिगड़ रही है और खेती के लिए फायदेमंद जीव भी मर रहे हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं। मिट्टी को जिस तत्व की जरूरत हो, उसी के हिसाब से खाद डालें ताकि खेत की सेहत बची रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा बनी रहे।
5 बीघा जमीन है, तो 1 बीघा में करें प्राकृतिक खेती
चौपाल में प्राकृतिक खेती अपनाने पर खास जोर दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से आह्वान किया कि अगर किसी किसान के पास 5 बीघा जमीन है, तो वह कम से कम 1 बीघा में प्राकृतिक खेती का प्रयोग जरूर करे। सरकार के अनुसार, किसानों को केवल एक ही फसल के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपनी जमीन के हिसाब से फसल चक्र में बदलाव करना चाहिए और साथ में फल, सब्जियां तथा दालें भी उगानी चाहिए। इस एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming) से खेती ज्यादा फायदेमंद साबित होगी।
कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि मंत्री ने संस्थान परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। इस किसान चौपाल में गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक, कृषि विभाग के कई बड़े अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में आम किसान मौजूद रहे।