बायोलॉजिकल एग्री सॉल्यूशंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BASAI) ने सरकार से बायोस्टिमुलेंट्स पर लागू होने वाले जीएसटी को लेकर सफाई मांगी है। उद्योग में इस बात को लेकर भ्रम है कि इन उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगना चाहिए या 18 प्रतिशत। बायोस्टिमुलेंट्स पौधों के विकास में मदद करते हैं और इन्हें 2021 से उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत नियंत्रित किया गया है।
बायोलॉजिकल एग्री सॉल्यूशंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BASAI) ने सरकार से बायोस्टिमुलेंट्स पर लागू होने वाले जीएसटी को लेकर सफाई मांगी है। उद्योग में इस बात को लेकर भ्रम है कि इन उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगना चाहिए या 18 प्रतिशत।बायोस्टिमुलेंट्स पौधों के विकास में मदद करते हैं और इन्हें 2021 से उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत नियंत्रित किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
BASAI के सीईओ विपिन सैनी ने बताया कि बायोस्टिमुलेंट्स पर जीएसटी को लेकर भ्रम की स्थिति है। कुछ जगहों पर इन्हें 5 प्रतिशत जीएसटी श्रेणी में रखा गया है, तो कुछ जगहों पर 18 प्रतिशत। मेरा मानना है कि यह 5 प्रतिशत की श्रेणी में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ कंपनियों को नोटिस मिले हैं, जिसमें कहा गया है कि बायोस्टिमुलेंट्स पर 5 प्रतिशत नहीं, बल्कि 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। सैनी ने कहा कि एचएसएन कोड में इसे कहां वर्गीकृत किया जाए, इसे लेकर भी कुछ अस्पष्टता है। हम इस मुद्दे पर सफाई मांग रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के दौर में जरूरी हैं बायोस्टिमुलेंट्स
BASAI की अध्यक्ष संदीपा कानिटकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच बायोस्टिमुलेंट्स समय की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के काम करने के तरीकों को अब बदलना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम उसी तरह की उत्पादकता में फंसे रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने कुछ बायोस्टिमुलेंट उत्पादों को अधिसूचित किया है और एक विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण होना चाहिए ताकि किसानों तक सर्वोत्तम उत्पाद पहुंचें। भारत में बायोस्टिमुलेंट्स का बाजार लगभग 2,500 से 3,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है।