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कर्नाटक : चीनी का दाम नहीं बढ़ा, गन्ना किसानों ने मांगा ₹6000 प्रति टन तक मुआवजा... CM ने कही ये बात

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 26 Oct 2026 07:13 PM IST
सार

कर्नाटक में गन्ना किसानों ने 6,000 रुपये प्रति टन तक मुआवजे की मांग की है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों और चीनी मिलों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र से मिलकर समाधान निकालने की बात कही।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कर्नाटक में गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर काम करेगी। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसी एक पक्ष का साथ नहीं देगी, बल्कि ऐसा समाधान निकालने की कोशिश करेगी, जिससे किसानों और चीनी मिलों दोनों को राहत मिले। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 26 अक्टूबर को बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों और विधायकों के साथ बैठक में यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों और चीनी मिलों का कारोबार एक-दूसरे पर निर्भर है। इसलिए इस विवाद को सुलझाने के लिए किसानों, मिल मालिकों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को मिलकर प्रयास करने होंगे।

किसानों को अब 6,000 रुपये प्रति टन तक मुआवजे की मांग
शिवकुमार ने बताया कि पिछली सरकार ने गन्ने का राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) बढ़ाकर 3,300 रुपये प्रति टन किया था। इस बढ़ी हुई राशि का भुगतान राज्य सरकार और चीनी मिलों को मिलकर करना था। उनके मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत चीनी मिलों ने भुगतान कर दिया था, लेकिन कुछ मिलों ने ऐसा नहीं किया और मामला अदालत तक पहुंच गया। इससे किसानों का चीनी उद्योग पर भरोसा कमजोर हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अब प्रति टन 6,000 रुपये तक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों का तर्क है कि पिछले करीब 10 वर्षों से चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है और केंद्र सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) भी नहीं बढ़ाया है।

चीनी मिलों की आर्थिक मुश्किलों पर भी जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलें भी कई वित्तीय और संचालन संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। इनमें बैंकिंग से जुड़ी दिक्कतें, इथेनॉल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता और बिजली की कीमतों का मुद्दा शामिल है।

उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याएं सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी चीनी उद्योग इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसलिए इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर समाधान निकालने की जरूरत है।

शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने इस मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बातचीत की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी भी इन समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों और विधायकों से अपील की कि वे अपनी मांगों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखें, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।

बारिश की कमी से गन्ने की पैदावार पर असर
मुख्यमंत्री ने कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार और उत्पादन में गिरावट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को केंद्र सरकार के सामने उठाने की जरूरत है। शिवकुमार के मुताबिक, कर्नाटक सरकार किसानों के खेतों में लगे पंप सेट को मुफ्त बिजली देने पर फिलहाल सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कम बारिश के बीच बिजली की खपत बढ़ने के कारण इस साल यह खर्च बढ़कर 32,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

किसानों का भरोसा जीतें चीनी मिलें
मुख्यमंत्री ने चीनी मिलों से किसानों का भरोसा दोबारा कायम करने की अपील की। उन्होंने सभी पक्षों से यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पिछले साल वाहनों में आगजनी जैसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि किसानों और चीनी मिलों के बीच विवाद का समाधान बातचीत और आपसी सहयोग से निकाला जाना चाहिए, ताकि गन्ना किसानों को उचित राहत मिले और चीनी उद्योग का कामकाज भी प्रभावित न हो।
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