झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड स्थित मलहरा गांव में लगभग 40 परिवार पिछले 20 वर्षों से फूलों की खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस किसानी से हर परिवार को हर मौसम में महीने के 10,000 से 20,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जिससे उन्हें अपने ही गांव में रोजगार मिल रहा है।
मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में भारी मांग
मलहरा गांव के किसान बाजार की मांग के अनुसार सफेद फूल, तगर, गेंदा, मघी और जवा फूल उगाते हैं। यहां से फूलों की सीधी आपूर्ति प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर, बासुकीनाथ मंदिर और आसनसोल तक होती है। शादी-विवाह और पूजा-पाठ के कारण साल भर फूलों की मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर नियमित बाजार मिल जाता है।
किसानों ने लगाई सरकारी मदद की गुहार
किसान प्रमोद पूजहर के अनुसार, वर्तमान में गांव के 40 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं। व्यापार को और बढ़ाने के लिए पूंजी और पानी की सख्त जरूरत है। किसानों का मानना है कि यदि सरकार उन्हें आर्थिक मदद, सिंचाई की सुविधा, उन्नत बीज और तकनीकी ज्ञान दे, तो अन्य बेरोजगार ग्रामीण भी इस काम से जुड़ सकते हैं।
पंचायत प्रशासन का सहयोग का भरोसा
मलहरा पंचायत की मुखिया खुशबू देवी ने फूलों की खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम बताया है। मुखिया के अनुसार, वह किसानों की सभी समस्याओं और जरूरतों का ब्योरा संबंधित सरकारी विभागों तक पहुंचाएंगी ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। उनका मानना है कि उचित बाजार और सुविधाएं मिलने पर गांव में इस कारोबार का बड़ा विस्तार संभव है।