रबी सीजन में गेहूं की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए सही किस्म का चुनाव काफी अहम है। जानकार अलग-अलग क्षेत्रों और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई तरह की किस्मों का जिक्र करते हैं। इनमें करन आदित्य (DBW 332), एमपी 3465 और करन शिवानी (DBW 327) प्रमुख हैं। इनकी औसत उपज 59 से 79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है।
करन आदित्य से औसत उपज 78.3 क्विंटल
करन आदित्य की औसत उपज 78.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि संभावित उपज 83 क्विंटल तक बताई गई है। इस किस्म में 12.2 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। साथ ही, यह पीले और भूरे रतुआ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है। प्रोटीन की अच्छी मात्रा और गुणवत्ता इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
एमपी 3465, मध्य भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए सही
एमपी 3465 को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने विकसित किया है। यह किस्म मध्य भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसकी औसत उपज 59.41 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और संभावित उपज 73.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इसमें पत्ती और पीले रतुआ रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता है। यह मध्यम अवधि में पककर तैयार होती है। बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित खाद और उचित सिंचाई जरूरी है।
करन शिवानी, गर्मी और सूखे को सहन करने की क्षमता
करन शिवानी को ICAR-IIWBR, करनाल ने विकसित किया है। इसकी औसत उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और संभावित उपज 87.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इस किस्म की खासियत है कि यह गर्मी और सूखे की परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसमें जिंक की मात्रा 40.6 पीपीएम दर्ज की गई है। वहीं, इसकी चपाती गुणवत्ता का स्कोर 7.67 अंक है।
अपने क्षेत्र के हिसाब से करें किस्म का चुनाव
तीनों किस्मों की अपनी अलग विशेषताएं हैं। करन आदित्य में प्रोटीन की अच्छी मात्रा और रतुआ रोगों से बचाव की क्षमता है। एमपी 3465 मध्य भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जबकि करन शिवानी गर्मी और सूखे की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।