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Home› Khabar Junction› Perilla Cultivation To Boost Earnings For Farmers In The Hills Icar Develops 2 New Varieties Promising Bumper

पहाड़ी किसानों की कमाई बढ़ाएगी पेरिला की खेती : ICAR ने 2 नई किस्मों का विकास किया, मिलेगी बंपर उपज, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 07 Nov 2026 07:02 PM IST
सार

  • पेरिला की दो नई उन्नत किस्में ICAR ने विकसित कीं।
  • दोनों किस्मों का औसत उत्पादन 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक।
  • पहाड़ी और बारिश पर निर्भर खेती के लिए उपयुक्त।
  • तेज हवा, बारिश और माहू कीट से फसल को कम नुकसान।

पेरिला पूर्वोत्तर की एक पारंपरकि तिलहनी फसल है।
पेरिला पूर्वोत्तर की एक पारंपरकि तिलहनी फसल है। - फोटो : सोशल मीडिया
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पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक तिलहनी फसल पेरिला किसानों के लिए आमदनी का एक नया विकल्प बन सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर ने इसकी दो उन्नत किस्में विकसित की हैं। पूवोत्तर पेरिला-1 और पूवोत्तर पेरिला-2 नाम की ये किस्में पहाड़ी क्षेत्रों और बारिश पर निर्भर खेती के लिए उपयुक्त पाई गई हैं। इनके जरिए किसानों को बेहतर बीज उत्पादन के साथ तेल आधारित उत्पाद तैयार करने का अवसर भी मिल सकता है।

दोनों किस्मों का औसत उत्पादन 10 क्विंटल से अधिक
ICAR के मुताबिक, किस्मों के मूल्यांकन के दौरान पूवोत्तर पेरिला-1 का औसत उत्पादन 11.15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया। वहीं, पूवोत्तर पेरिला-2 से औसतन 10.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली। पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों के अलग-अलग स्थानों पर इन दोनों किस्मों का औसत उत्पादन 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के बीच रहा।

संस्थान के अनुसार, फसल का उचित प्रबंधन और मिट्टी में पर्याप्त उर्वरता होने पर किसानों के खेतों में इन किस्मों से 13 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है।

तेज हवा और बारिश में भी फसल को कम नुकसान
ICAR उमियम के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमित कुमार के अनुसार, ये किस्में उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र और पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र में खरीफ मौसम के दौरान बारिश पर निर्भर खेती के लिए खास तौर पर उपयुक्त हैं। इन इलाकों में अनियमित बारिश, तेज हवाएं और पहाड़ी जमीन के कारण खेती करना चुनौतीपूर्ण होता है।

उन्होंने बताया कि तेज बारिश और हवाओं के दौरान इन किस्मों की फसल गिरने की आशंका कम रहती है। इनमें माहू जैसे प्रमुख कीट के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी पाई गई है। किस्मों के मूल्यांकन के दौरान फसल की बढ़वार और प्रजनन अवस्था में कोई या बहुत कम रोग प्रकोप दर्ज किया गया।

पहाड़ी क्षेत्रों के छोटे किसानों के लिए उपयोगी विकल्प
पूवोत्तर पेरिला-1 और पूवोत्तर पेरिला-2 को पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों की अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में अनुकूलता, बीज में अधिक तेल की मात्रा और कीटों व रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता इनकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

इन गुणों के आधार पर ये किस्में खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। बारिश पर निर्भर पहाड़ी इलाकों में इनकी खेती से पेरिला के बीज उत्पादन और उनसे बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।


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