रबी सीजन में चने की बुवाई के दौरान किसानों के सामने सबसे अहम सवाल अच्छी किस्म के चुनाव का होता है। सही किस्म का चयन फसल की पैदावार और गुणवत्ता को प्रभावित करता है। अलग-अलग राज्यों की जलवायु और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चने की कई किस्में विकसित की गई हैं। इनमें बिदिशा (डब्ल्यूबीजी 29), बीडीएनजीके 798 और गुजरात जूनागढ़ ग्राम 6 (जीजेजी 6) शामिल हैं। इनकी उत्पादन क्षमता, पकने की अवधि और खासियत अलग-अलग हैं।
बिदिशा किस्म से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज
पश्चिम बंगाल के लिए विकसित बिदिशा किस्म को डब्ल्यूबीजी 29 और बीजी 1084 के नाम से भी जाना जाता है। इस किस्म की औसत उपज करीब 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है और फसल लगभग 131 दिन में पककर तैयार होती है। बिदिशा की खासियत यह है कि देर से बुवाई की स्थिति में भी यह अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। यह मध्यम अवधि में पकने वाली देसी किस्म है। पछेती बुवाई करने वाले पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए यह किस्म एक विकल्प हो सकती है।
बीडीएनजीके 798 सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त काबुली किस्म
महाराष्ट्र के किसानों के लिए बीडीएनजीके 798 काबुली चने की एक किस्म है। इसे साल 2016 में जारी किया गया था। इसका विकास जालना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में हुआ है। इसकी औसत उपज 16 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। फसल को तैयार होने में करीब 120 से 135 दिन लगते हैं।
इस किस्म के दाने सफेद और आकार में बड़े होते हैं। 100 बीजों का वजन लगभग 29 ग्राम होता है। यह सिंचित क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, मुरझान और स्टंट रोगों के प्रति इसमें मध्यम प्रतिरोधक क्षमता बताई गई है। दानों के आकार और रंग के कारण यह काबुली चने की श्रेणी में आती है।
गुजरात जूनागढ़ ग्राम से 130 दिन में फसल की कटाई
गुजरात जूनागढ़ ग्राम 6 यानी जीजेजी 6 को साल 2016 में जारी किया गया था। इसका विकास जूनागढ़ में किया गया है। यह गुजरात के किसानों के लिए विकसित चने की किस्म है। इसकी औसत उपज 16 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है और यह करीब 120 से 130दिन में पककर तैयार हो जाती है। जीजेजी 6 सामान्य समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त है। इसकी एक प्रमुख विशेषता मुरझान और स्टंट रोगों के प्रति सहनशीलता है। सामान्य बुवाई की परिस्थितियों में अच्छी उपज देने की क्षमता के कारण यह गुजरात के किसानों के लिए एक विकल्प मानी जाती है।