मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में किसान अब गेहूं, चना और सोयाबीन के साथ नई फसलों की खेती भी कर रहे हैं। बेगमगंज तहसील के सुनेहरा गांव में चिया सीड की खेती किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन रही है। यहां किसान गोविंद सिंह ने एक एकड़ में चिया सीड उगाकर 1.07 लाख रुपये की सकल आय हासिल की। खास बात यह है कि इसकी खेती में बीज पर केवल 200 रुपये खर्च हुए, जबकि खेत की तैयारी और निराई-गुड़ाई समेत कुल लागत करीब 5 हजार रुपये प्रति एकड़ आई।
200 रुपये के बीज से एक एकड़ में 5.5 क्विंटल उत्पादन
सुनेहरा गांव के किसान गोविंद सिंह पिछले दो साल से चिया सीड की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे गेहूं और चने जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे। बाद में उन्होंने अश्वगंधा की खेती शुरू की, लेकिन इसमें प्रति एकड़ करीब 50 हजार रुपये खर्च होते थे। मौसम खराब होने पर नुकसान का खतरा भी रहता था।
इसके बाद उद्यानिकी विभाग की सलाह पर उन्होंने रबी के मौसम में चिया सीड की खेती आजमाई। उन्होंने एक किलोग्राम बीज 200 रुपये में खरीदा और एक एकड़ में बुवाई की। खेत की तैयारी, बीज और निराई-गुड़ाई सहित कुल खर्च करीब 5 हजार रुपये आया।
गोविंद सिंह के मुताबिक, एक एकड़ से उन्हें 5.5 क्विंटल चिया सीड मिला। इसे उन्होंने नीमच मंडी में 19,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचा। इससे कुल 1,07,250 रुपये की सकल आय हुई। इस सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने इस साल पांच एकड़ में चिया सीड की बुवाई की है।
मवेशी भी नहीं खाते चिया सीड की फसल
गांव के किसान कृष्ण मुरारी के मुताबिक, चिया सीड की खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर खर्च कम रखने की गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि इसकी पत्तियों में मौजूद तेज गंध के कारण आवारा मवेशी और नीलगाय आमतौर पर इस फसल को नहीं खाते। इससे फसल की रखवाली में किसानों की परेशानी कम हो सकती है। फसल में रस चूसने वाले कीटों का हल्का असर होने पर किसान नीम के तेल या अन्य उपयुक्त जैविक उपायों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कीटों की पहचान और नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।
बेगमगंज में 55 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में खेती
बेगमगंज क्षेत्र में चिया सीड की खेती का रकबा भी बढ़ रहा है। शुरुआत में यहां केवल चार से पांच एकड़ में इसकी बुवाई होती थी, लेकिन अब यह क्षेत्र 55 एकड़ से अधिक हो गया है। उद्यानिकी विभाग की उप संचालक नीलम पाटिल के अनुसार, क्षेत्र में 20 से 25 किसान अश्वगंधा और चिया सीड जैसी औषधीय व सुगंधित फसलों की खेती कर रहे हैं। इन फसलों में पारंपरिक उद्यानिकी फसलों की तुलना में लागत कम होने और बेहतर कमाई की संभावना है। विभाग के मुताबिक, चिया सीड की खेती में प्रति हेक्टेयर करीब 25 हजार रुपये खर्च आता है और अनुकूल परिस्थितियों में 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है।
पोषक तत्वों से भरपूर है चिया सीड
चिया सीड का वैज्ञानिक नाम साल्विया हिस्पैनिका है। इसके बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। संतुलित आहार में इसका इस्तेमाल पाचन और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। बाजार में इसकी मांग और कीमत को देखते हुए किसान इसे अतिरिक्त आमदनी के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। हालांकि, खेती शुरू करने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, संभावित पैदावार, बिक्री के बाजार और उपलब्ध खरीदारों की जानकारी जरूर जुटानी चाहिए।
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