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तेलंगाना : किसानों को मुआवजे में देरी पर सख्ती, मंत्री ने तुरंत भुगतान के दिए निर्देश

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 21 Sep 2026 07:33 PM IST
सार

तेलंगाना में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के करीब ₹813 करोड़ जिला स्तर पर लंबित हैं। सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने जिलाधिकारियों और सिंचाई अधिकारियों को प्रभावित किसानों को जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी
तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने जिला कलेक्टरों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) के लिए जारी राशि जल्द से जल्द प्रभावित किसानों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि पैसा सरकारी खातों में पड़ा नहीं रहना चाहिए और इसकी वजह से सिंचाई परियोजनाओं का काम नहीं रुकना चाहिए।

मंत्री ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जिला कलेक्टरों के साथ जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि 1 अप्रैल से अब तक करीब 3,101 करोड़ रुपये के भुगतान टोकन जारी किए गए हैं और करीब 2,504 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद लगभग 813 करोड़ रुपये का भुगतान अभी जिला स्तर पर लंबित है। इसमें करीब 502 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण अधिकारियों और 311 करोड़ रुपये कलेक्टरों के पास हैं।

उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि अगर पैसा जारी हो चुका है तो उसे जमीन गंवाने वाले किसानों तक पहुंचना चाहिए। किसी वास्तविक वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है तो अधिकारियों को कारण बताकर राशि वापस करनी चाहिए, न कि उसे बिना इस्तेमाल के खाते में रखना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भुगतान के लिए टोकन तभी जारी किए जाएं, जब मुआवजे का आदेश (अवार्ड) हो चुका हो और मामला भुगतान के लिए पूरी तरह तैयार हो। साथ ही उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों के साथ न्यायपूर्ण और मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। मुआवजा कानूनी प्रक्रिया के तहत संभव हो तो मौजूदा बाजार मूल्य के करीब होना चाहिए।

जिन मामलों में अवार्ड के बाद भी मुआवजा नहीं मिला है, वहां नियमों के अनुसार ब्याज का भुगतान करने के निर्देश दिए गए। अदालत या जमीन के मालिकाना हक से जुड़े विवाद वाले मामलों की अलग सूची तैयार कर उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए महाधिवक्ता के सामने रखने को कहा गया।

बैठक में नलगोंडा, यादाद्री-भुवनगिरी, नारायणपेट, सिद्दीपेट, विकाराबाद, जगतियाल और हनुमाकोंडा समेत कई जिलों में जमीन अधिग्रहण की स्थिति की समीक्षा की गई। नलगोंडा में चिंतापल्ली जलाशय, पेंडलीपाका बैलेंसिंग जलाशय, उदयसमुद्रम और नेल्लिकल्लू परियोजनाओं से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।

मंत्री ने कहा कि कई सिंचाई परियोजनाएं काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं, लेकिन नहरों, जोड़ने वाले कार्यों और जमीन अधिग्रहण के छोटे-छोटे लंबित हिस्सों के कारण किसानों को परियोजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। मुख्य सचिव ने भी अधिकारियों को सलाह दी कि जब भुगतान के मामले तैयार हों, तभी राशि मांगी जाए, ताकि सरकारी पैसा लंबे समय तक खातों में बेवजह न पड़ा रहे।
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