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तेलंगाना : मानसून की बेरुखी से संकट में खेती, सूखे जैसे हालात, 235 मंडल प्रभावित, पेयजल को लेकर भी बढ़ी चिंता

गांव जंक्शन डेस्क, हैदराबाद Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 09 Oct 2026 08:59 PM IST
सार

तेलंगाना में मानसून के दौरान सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश हुई है और करीब 235 मंडल सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री 12 अक्तूबर को कृषि, सिंचाई, पेयजल और बिजली आपूर्ति से जुड़े उपायों पर बैठक करेंगे। राज्य ने केंद्र से 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है। जानिए, विस्तार से...

अल-नीनो से जुड़ी परिस्थितियों के बीच तेलंगाना में इस मानसून सीजन में सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
अल-नीनो से जुड़ी परिस्थितियों के बीच तेलंगाना में इस मानसून सीजन में सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मानसून की बारिश खेती के लिए जीवनरेखा है, लेकिन तेलंगाना में इस बार आसमान की बेरुखी ने कृषि और जल प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। सामान्य से कम बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी के साथ सिंचाई, पेयजल और बिजली की मांग को लेकर भी चिंता गहरा रही है। राज्य के करीब 235 मंडलों में सूखे जैसे हालात हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, अल-नीनो से जुड़ी परिस्थितियों के बीच इस मानसून सीजन में सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। संकट से निपटने के उपायों पर विचार करने के लिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 12 अक्तूबर को मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे।

इस बैठक में कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बढ़ती बिजली मांग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा होगी। मंत्रिमंडल की उपसमिति पहले ही एक कार्ययोजना तैयार कर चुकी है। सरकार किसान संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सुझावों पर भी विचार करेगी।

राज्य मंत्रिमंडल ने एक अक्तूबर को कम बारिश से पैदा हुई स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया था। विधानसभा में केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता देने का अनुरोध करते हुए 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग भी की गई है।

बारिश की कमी से पैदा हुई चुनौती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। खेती, जल संसाधनों और बिजली की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना राज्य सरकार के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।
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