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आंध्र प्रदेश में किसानों को भूमि का मालिकाना हक : किसानों के हाथों में जमीन का अधिकार, 40.5 लाख पासबुक वितरित

गांव जंक्शन डेस्क, हैदराबाद Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 09 Oct 2026 09:08 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश में 40.5 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 51 लाख और पासबुक बांटने तथा पुराने भूमि विवाद सुलझाने का लक्ष्य बताया है। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू - फोटो : AI Image
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किसान के लिए जमीन सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, पीढ़ियों की मेहनत और परिवार के भविष्य का आधार भी है। ऐसे में जमीन के दस्तावेजों में स्पष्टता और मालिकाना हक का भरोसा ग्रामीण जीवन में बड़ी अहमियत रखता है। आंध्र प्रदेश में सरकार का दावा है कि भूमि पासबुक वितरण और जमीन का दोबारा सर्वे इसी दिशा में किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को प्रकाशम जिले के कोंडापी क्षेत्र में बताया कि राज्य में अब तक 40.5 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं। इन पर सरकारी मुहर अंकित है। अक्तूबर में ही 790 गांवों में चार लाख से अधिक पासबुक बांटी गईं। सरकार का लक्ष्य शेष 51 लाख पासबुक भी वितरित करना है।

नरसिंहोलु गांव में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और अंतिम पात्र किसान तक दस्तावेज पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने जमीन संबंधी अधिकारों के लिए अधिकारियों के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

नायडू ने दावा किया कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान विरोधियों से जुड़ी जमीनों को प्रतिबंधित सूची में डाला गया था और ऐसी जमीनों का क्षेत्रफल 16.4 लाख एकड़ था। यह उनका राजनीतिक आरोप है। मुख्यमंत्री ने दशकों से लंबित भूमि विवादों से जुड़े किसानों को दस्तावेज भी सौंपे।

सरकार ने पोथुला चेंचय्या पालेरू जलाशय को दो साल में 166 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करने का लक्ष्य भी बताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे क्षेत्र के 9,500 एकड़ में सिंचाई और 15 गांवों के करीब 35,000 लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने राज्य की 36 सिंचाई परियोजनाओं को तीन साल में पूरा करने और नदियों को जोड़कर जल उपलब्धता बढ़ाने की योजना का भी उल्लेख किया।

 
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