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गुजरात में 50 करोड़ रुपये की योजना : जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक निर्माण को बढ़ावा देगी सरकार

गांव जंक्शन डेस्क, गांधीनगर Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 09 Oct 2026 09:29 PM IST
सार

गुजरात पांच वर्षों में 50 करोड़ रुपये से जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक निर्माण तंत्र विकसित करने की योजना बना रहा है। आनंद कृषि विश्वविद्यालय का सूक्ष्मजीव अनुसंधान इस पहल को आधार देगा। जानिए, विस्तार से...
 

गुजरात पांच साल में 50 करोड़ रुपये से जैव उर्वरक-कीटनाशक उत्पादन को देगा बढ़ावा।
गुजरात पांच साल में 50 करोड़ रुपये से जैव उर्वरक-कीटनाशक उत्पादन को देगा बढ़ावा। - फोटो : ati
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विस्तार
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खेती में खाद की समय पर उपलब्धता फसल की बढ़वार और उत्पादकता के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताएं कृषि इनपुट की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बना रही हैं।

गुजरात ने जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पांच साल में 50 करोड़ रुपये के एकीकृत जैव विनिर्माण तंत्र की योजना बनाई है।

गुजरात राज्य जैव प्रौद्योगिकी मिशन (जीएसबीटीएम) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत इस पहल को विकसित कर रहा है। इसके अंतर्गत सूक्ष्मजीवों की खोज और अनुसंधान से लेकर उत्पाद निर्माण, खेतों में परीक्षण और किसानों तक तकनीक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने का लक्ष्य है।

इस व्यवस्था में कृषि विश्वविद्यालयों, जैव प्रौद्योगिकी संस्थानों, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, सहकारी संस्थाओं और किसानों को जोड़ने की योजना है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ने उर्वरकों की आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा, परिवहन और खनिज संसाधनों पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों को फिर उजागर किया है।

नाइट्रोजन उर्वरकों के उत्पादन में प्राकृतिक गैस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक विशेष खनिज संसाधनों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में जैव उर्वरक, जैव उद्दीपक और सूक्ष्मजीव आधारित उत्पाद कृषि इनपुट के विकल्पों में विविधता लाने तथा पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग में योगदान दे सकते हैं। हालांकि, इनका अर्थ पारंपरिक उर्वरकों की तत्काल जगह लेना नहीं है।

आणंद कृषि विश्वविद्यालय पहले ही एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम, राइजोबियम और फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों पर आधारित जैव उर्वरक तकनीक विकसित और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध करा चुका है।

विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2024-25 तक करीब 42 लाख लीटर जैव उर्वरक उत्पादों का उत्पादन और बिक्री की जा चुकी थी, जिनका उपयोग लगभग 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ।

विश्वविद्यालय के पास जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक और जैव अपघटक से जुड़े 1,000 से अधिक सूक्ष्मजीव कल्चर का संग्रह भी है। इसके 148 सूक्ष्मजीव स्ट्रेन के डीएनए अनुक्रम राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र में जमा किए गए हैं।

जीएसबीटीएम और आनंद कृषि विश्वविद्यालय के बीच नौ अक्तूबर को भावनगर में जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक निर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने थे। इस पहल का उद्देश्य शोध को व्यावसायिक उत्पादन से जोड़ना और किसानों के लिए जैविक कृषि इनपुट की उपलब्धता बढ़ाना है।

गुजरात ने जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षों में 50 करोड़ रुपये के एकीकृत जैव विनिर्माण तंत्र की योजना बनाई है। आणंद कृषि विश्वविद्यालय की मौजूदा शोध क्षमता और सूक्ष्मजीव संग्रह इस पहल का वैज्ञानिक आधार बन सकते हैं।


 
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