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तमिलनाडु : गन्ना किसानों को ₹709.50 प्रति टन प्रोत्साहन राशि का इंतजार, सरकार ने मंजूर किए ₹603 करोड़

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Nov 2026 07:00 PM IST
सार

तमिलनाडु के गन्ना किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन विशेष प्रोत्साहन राशि मिलेगी। सरकार ने 603.34 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। जानिए भुगतान, एफआरपी और किसानों की मांग से जुड़ी पूरी जानकारी।

गन्ना किसान
गन्ना किसान - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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तमिलनाडु के गन्ना किसान राज्य सरकार से 2025-26 के पेराई सत्र की विशेष प्रोत्साहन राशि जल्द जारी करने की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों ने सरकार से दीपावली से पहले 709.50 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान करने की अपील की है। राज्य सरकार इस योजना के लिए 603.34 करोड़ रुपये मंजूर कर चुकी है। किसानों का कहना है कि गन्ना वर्ष 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है और आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों को इस राशि से राहत मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए गन्ने का न्यूनतम उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 3,290.50 रुपये प्रति टन तय किया है। इसमें राज्य सरकार की 709.50 रुपये प्रति टन की विशेष प्रोत्साहन राशि जोड़ने पर पात्र किसानों को कुल 4,000 रुपये प्रति टन मिलेंगे। इस योजना से पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों को गन्ना देने वाले करीब 9,000 पंजीकृत किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

पहले से ज्यादा हुई प्रोत्साहन राशि
तमिलनाडु सरकार ने विशेष प्रोत्साहन राशि को पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल में दिए जाने वाले 349 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 709.50 रुपये प्रति टन कर दिया है। राज्य में 2025-26 के पेराई सत्र में कुल 29 चीनी मिलें संचालित हुईं। इनमें 12 सहकारी, दो सरकारी क्षेत्र की और करीब 15 निजी चीनी मिलें शामिल हैं।

इस सत्र में राज्य की चीनी मिलों में औसत चीनी रिकवरी करीब 9 प्रतिशत रही। केवल चार मिलों में रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कुछ अधिक दर्ज की गई। धर्मपुरी की सुब्रमणिया शिवा सहकारी चीनी मिल में सबसे ज्यादा रिकवरी रही। ज्यादातर मिलों को गन्ना देने वाले किसानों को फिलहाल 3,290.50 रुपये प्रति टन की न्यूनतम एफआरपी मिली है। अब वे राज्य सरकार की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रहे हैं।

क्या है एफआरपी और रिकवरी का गणित?
केंद्र सरकार हर पेराई सत्र से पहले कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर गन्ने का एफआरपी तय करती है। वर्ष 2025-26 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर एफआरपी 3,550 रुपये प्रति टन निर्धारित की गई है।

रिकवरी का मतलब है कि एक टन गन्ने से कितनी चीनी प्राप्त होती है। रिकवरी दर में हर 0.1 प्रतिशत अंक के बदलाव के साथ एफआरपी में भी बदलाव होता है। हालांकि, 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी होने पर भी किसानों को कम से कम 3,290.50 रुपये प्रति टन एफआरपी देने की गारंटी है। इस स्तर से नीचे रिकवरी होने पर भी एफआरपी में कटौती नहीं की जाती।

कम बारिश से आर्थिक संकट में किसान
नमक्कल जिले के किसान आर. वेलुसामी मोहनूर सहकारी चीनी मिल को गन्ना देते हैं। उन्होंने सरकार से दीपावली से पहले प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस साल कम बारिश के कारण किसानों को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अतिरिक्त भुगतान मिलने से उन्हें राहत मिलेगी।

विवसाय मुन्नेत्र कड़गम के महासचिव के. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि चीनी मिलें प्रोत्साहन राशि पाने वाले किसानों की सूची तैयार कर रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ बिचौलिए बड़ी मात्रा में गन्ना खरीदकर अपने नाम से मिलों को आपूर्ति दर्ज करा सकते हैं। इससे वास्तविक गन्ना उत्पादक किसान योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने सरकार से लाभार्थियों की सूची का सही तरीके से सत्यापन कराने की मांग की है, ताकि प्रोत्साहन राशि उन्हीं किसानों को मिले जिन्होंने वास्तव में गन्ने की खेती की और चीनी मिलों को फसल बेची।

87 लाख टन गन्ने की हुई पेराई
तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव एस. विमलनाथन के मुताबिक, प्रतिकूल मौसम के बावजूद इस पेराई सत्र में करीब 87 लाख टन गन्ने की पेराई हुई है। उन्होंने भी सरकार से दीपावली से पहले किसानों को प्रोत्साहन राशि देने की मांग की।

विमलनाथन ने कहा कि पिछले साल चीनी का भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 65 रुपये से अधिक हो गया है। इसके अलावा चीनी मिलों को इथेनॉल, अल्कोहल और बिजली उत्पादन से भी आमदनी होती है। ऐसे में किसानों को भी उनकी मेहनत का उचित लाभ मिलना चाहिए।

जिला समितियों की मंजूरी के बाद खातों में आएगी रकम
चीनी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, राज्य की सभी चीनी मिलों में पात्र किसानों की सूची तैयार की जा रही है। कुछ मिलों ने यह काम पूरा कर लिया है। भुगतान से पहले जिला स्तरीय समितियां इन सूचियों की जांच करेंगी और मंजूरी देंगी।

अधिकारी ने बताया कि प्रोत्साहन राशि के लिए बजट मंजूर हो चुका है। जिला समितियों से स्वीकृत सूची मिलने के बाद जल्द भुगतान शुरू किया जाएगा। यह रकम प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए पात्र किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके लिए तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी की मदद ली जाएगी।
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