सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार, 2 नवंबर से तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेले और कृषि उद्योग प्रदर्शनी की शुरुआत हुई। इस बार मेले की थीम ‘विज्ञान आधारित कृषि-खुशहाल किसान’ रखी गई है। पहले दिन मेले में 6 हजार से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। यहां लगाए गए 140 से अधिक स्टॉल पर किसानों को खेती की नई तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों और खाद-कीटनाशकों की जानकारी दी गई।
मेले में श्वान प्रदर्शनी के साथ फल, फूल और शाकभाजी की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। किसानों के साथ महिला किसानों और माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी मेले का भ्रमण किया। उन्होंने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर आधुनिक खेती से जुड़ी तकनीकों और उपकरणों के बारे में जानकारी ली।
140 से अधिक स्टॉल लगाए गए
मेले में कृषि यंत्रों से जुड़ी कंपनियों के नौ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सात, कीटनाशक कंपनियों के नौ और उर्वरक कंपनियों के 14 स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा पशुपालन, पशु पोषण, दवाइयों और उपचार से जुड़ी कंपनियों के 15 स्टॉल भी लगाए गए। सरकारी संस्थाओं और 20 कृषि विज्ञान केंद्रों ने भी अपने स्टॉल लगाए। इस तरह मेले में कुल स्टॉल की संख्या 140 से अधिक रही। विश्वविद्यालय की ओर से मेले में 6 लाख रुपये से अधिक के बीजों की बिक्री भी की गई।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताईं खेती की नई तकनीकें
मेले में कृषि विचार गोष्ठी और किसान चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने किसानों को रबी फसलों की खेती, फसलों में रोग और कीट प्रबंधन, फल उत्पादन की तकनीक और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां दीं। किसानों ने खेती और पशुपालन से जुड़ी अपनी समस्याएं भी वैज्ञानिकों के सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने उनके सवालों के जवाब देकर समस्याओं के समाधान बताए। विश्वविद्यालय के कुलपति ने किसान मेले में लगी श्वान प्रदर्शनी और फल, फूल व शाकभाजी प्रदर्शनी का भ्रमण किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण किया और वहां प्रदर्शित तकनीकों की सराहना की।
पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर
विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. सतेंद्र कुमार ने बताया कि इस साल मेले की थीम ‘विज्ञान आधारित कृषि-खुशहाल किसान’ है। उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित खेती से ही किसानों की समृद्धि और विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसके लिए पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़ना जरूरी है। उन्होंने किसानों को उन्नत बीजों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन और डिजिटल कृषि तकनीकों को अपनाने की जरूरत बताई।
3 नवंबर को होगा उद्घाटन समारोह
किसान मेले के दूसरे दिन 3 नवंबर को सुबह 11 बजे मंडलीय रबी गोष्ठी और किसान मेला उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही होंगे। राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कृषि उत्पादन आयुक्त और कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगा सुंदरम विशिष्ट अतिथि रहेंगे। कार्यक्रम के आयोजन में विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, सभी अधिष्ठाताओं, निदेशकों और प्रसार निदेशालय के कर्मचारियों का सहयोग रहा।
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