खरीफ फसलों की कटाई के बाद अब रबी सीजन की बुआई की तैयारी शुरू हो गई है। इसे देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को देशभर में खेती-किसानी की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर नुकसान का आकलन और मुआवजे के भुगतान में देरी न हो। कृषि मंत्री ने कहा कि संकट के समय किसानों की मदद के लिए अधिकारी पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करें।
रबी की बुआई के लिए खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता
बैठक में बताया गया कि देशभर में खरीफ फसलों की कटाई चल रही है। मूंग और सोयाबीन की कटाई अब अंतिम चरण में है। इस पर कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कटाई के बाद खेतों में बची नमी का इस्तेमाल करते हुए रबी फसलों की बुआई में तेजी लाई जाए।
सरकार के अनुसार, रबी सीजन के लिए यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसी जरूरी खादों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। प्रमाणित बीजों की भी कमी नहीं है। किसानों को बुआई के समय खाद की परेशानी न हो, इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर जिला स्तर तक इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि जिन इलाकों में सिंचाई के लिए पानी कम उपलब्ध है, वहां किसानों को ऐसी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिनमें कम पानी और कम लागत की जरूरत होती है। इनमें चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज शामिल हैं। इसके अलावा, तापमान में उतार-चढ़ाव सहने वाली उन्नत और गर्मी रोधी किस्मों के बीज किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
MSP से ऊपर चल रहे हैं कई फसलों के दाम
बैठक में मंडियों के ताजा भाव का विश्लेषण भी रखा गया। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों जैसी प्रमुख फसलों के बाजार भाव फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर चल रहे हैं। सरकार के मुताबिक, इससे किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिल रहा है।
फसल नुकसान का आकलन और बीमा भुगतान जल्द करने के निर्देश
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की मदद को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार संकट की घड़ी में किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अत्यधिक बारिश और बाढ़ से प्रभावित इलाकों के साथ-साथ सूखे का सामना कर रहे राज्यों के किसानों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए।
बैठक में कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे सूखा प्रभावित राज्यों का भी जिक्र किया गया। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के तहत फसल नुकसान का जल्द आकलन किया जाए। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के दावों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि उन्हें समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
हर हफ्ते खेती-किसानी की स्थिति की समीक्षा करेंगे मंत्री
बैठक में आने वाले दिनों में चक्रवाती बारिश से खेतों में बनने वाली नमी का इस्तेमाल रबी की बुआई में करने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह हर हफ्ते खेती-किसानी की स्थिति की समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ने पर वह राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों से सीधे बात करेंगे, ताकि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जा सके।