बाजार जानकारों के अनुसार, दालों की बढ़ती खपत और घरेलू उत्पादन से जुड़ी चिंताओं के कारण आगामी कुछ सालों में भारत का विदेश से दलहन आयात 1 से 1.2 करोड मीट्रिक टन पहुंच सकता है। जानकारों के अनुसार, यह मौजूदा 60 लाख टन आयात के मुकाबले लगभग दोगुना होगा।
2035 तक 4.5 करोड़ टन पहुंच सकती है खपत
जानकारों की मानें तो इस समय भारत में 3 करोड़ टन दालों की खपत होती है, जो 2035 में बढ़कर 4.5 करोड़ टन हो सकती है।
कनाडा के किसानों के लिए अवसर
भारत में दालों की खपत बढ़ती खपत कनाडा के किसानों के लिए अवसर है, क्योंकि कनाडा भारत के लिए दालों का प्रमुख निर्यातक देश है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान टॉर्क इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी गरिमा जैन ने भारतीय बाजार की मांग की मांग को देखते हुए कनाडा के किसानों को दलहन फसलों के रकबे में बढ़ोतरी को जारी रखने का सुझाव दिया है। उनके कहना है कि भारत की नीतिगत सोच मात्र सप्लाई की कमी को संभालने के बजाय मांग आधािरत फैसले लेने की ओर बदल रही है।
वर्तमान में भारत कई देशों से दालों की खरीद करता है, जिनमें अफ्रीका, ब्राजिल, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल है।
दालों के आयात में 62 फीसदी का उछाल
ताजा व्यापर आंकड़े बताते हैं कि दालों के लिए विदेश पर निर्भरता तेजी से बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष (2026-27) के अप्रैल से जुलाई महीनों के दौरान भारत का दलहन आयात 62 प्रतिशत बढ़कर 17 लाख टन पहुंच गया। वहीं, आयात की कुल लागत 32 प्रतिशत बढ़कर 0.97 अरब डॉलर हो गई।
मानसून की कमी और आयात शुल्क पर सरकार की नजर
वर्तमान में भारत सरकार पीली मटर पर 30 प्रतिशत और मसूर पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क (टैरिफ) लेती है। गरिमा जैन के अनुसार, सरकार आयात नीति में कोई भी नया बदलाव करने से पहले आने वाली रबी फसल की स्थिति का स्पष्ट आकलन कर सकती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से 15 प्रतिशत कम रहने के कारण खरीफ दलहन की पैदावार पर दबाव पड़ सकता है, जिससे आयात बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। गरिमा जैन ने बताया कि यदि देश में आपूर्ति कम होती है और कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार आयात शुल्क में ढील देने पर विचार कर सकती है।