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Home Grown Maize: घर पर उगाएं बिना रसायन वाला मक्का, बनाएं तरह-तरह की डिश, जानें बुवाई से तुड़ाई तक की जानकारी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 27 Sep 2026 11:06 AM IST
सार

  • घर के बगीचे में भी जैविक तरीके से मकई उगाई जा सकती है
  • दोमट मिट्टी, अच्छी जल निकासी और 6-8 घंटे धूप जरूरी बताई गई है
  • 12-14 इंच गहरे और चौड़े गड्ढे में 1-1.5 इंच गहराई पर बीज बोएं
  • जैविक खाद, नियमित सिंचाई और नीम तेल से पौधों की देखभाल की जा सकती है
  • करीब 80-90 दिनों में भुट्टे तोड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं

घर के बगीचे में आसनी से उगाएं जैविक मक्का।
घर के बगीचे में आसनी से उगाएं जैविक मक्का। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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घर के बगीचे में जैविक तरीके से मक्का उगाना काफी आसान है। सही तरह से बुवाई और देखभाल से आपके घर पर ही रसायन मुक्त मक्के फसल तैयार हो जाएगी, जिससे आप तरह-तरह के व्यंजन बना सकते हैं। सबसे पहले बगीचे की मिट्टी दोमट श्रेणी में होनी चाहिए। वहीं, मिट्टा का 6 से 7 के बीच पीएच बेहतर माना जाता है। ध्यान रखें की पौधों को रोजाना 6 से 8 घंटी की सीधी धूप चाहिए होती है। वहीं, बगीचे में जलभराव से बचने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करें। 

ऐसे तैयार करें मिट्टी
मक्का उगाने के लिए मिट्टी का मिश्रण तैयार करते समय 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद, 10 प्रतिशत कोकोपीट और 10 प्रतिशत नीम खली का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए।

घरेलू बगीचे में मक्का लगाने के लिए गड्ढा कम से कम 12 से 14 इंच गहरा और 12 से 14 इंच चौड़ा रखना चाहिए।  भारत में गर्मी की फसल के लिए फरवरी-मार्च और मानसून की फसल के लिए जून-जुलाई में बुवाई का समय बताया गया है। हालांकि, क्षेत्र के अनुसार बुवाई का समय बदल सकता है।

1 से 1.5 इंच गहराई पर बोएं बीज
मकई की बुवाई के लिए अच्छे और स्वस्थ ऑर्गेनिक या देसी बीज चुनने की सलाह दी गई है। बीजों को करीब 1 से 1.5 इंच की गहराई में बोना चाहिए। जमीन में पौधों के बीच 8 से 10 इंच की दूरी रखने की जानकारी दी गई है। बीज बोने के बाद हल्का पानी देना चाहिए और मिट्टी में नमी बनाए रखनी चाहिए। गर्मियों में सुबह या शाम पानी देने की सलाह दी गई है। सिंचाई के दौरान जलभराव नहीं होना चाहिए।

जैविक खाद और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें
पौधों में जैविक पोषण बनाए रखने के लिए गोबर की खाद, कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। हर 15 दिन में हल्की गुड़ाई करने और गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने की सलाह दी जाती है। 20 से 25 दिन बाद जीवामृत या केले के छिलके का पानी फसल विकास को रफ्तार दे सकता है। 

पौधों में कीट दिखाई देने पर नीम तेल के घोल का छिड़काव किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, करीब 80 से 90 दिनों में जैविक भुट्टे तोड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं।
 
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