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वैज्ञानिकों का अनोखा अध्ययन : खेत की मिट्टी में दबाया सूती कपड़ा, 2 महीने बाद मिला मिट्टी की सेहत का संकेत...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 27 Sep 2026 10:44 AM IST
सार

  • वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जैविक सक्रियता समझने के लिए सूती कपड़े का आसान तरीका अपनाया
  • करीब दो महीने बाद कपड़ा निकालकर देखा गया कि वह कितना गल चुका है
  • ज्यादा सक्रिय मिट्टी में सूती कपड़ा तेजी से टूटकर गल गया

मिट्टी की सेहत जानने के लिए सूती कपड़े का उपयोग।
मिट्टी की सेहत जानने के लिए सूती कपड़े का उपयोग। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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मिट्टी की सेहत का पता लगाने के लिए भारत में किसान लैब में मिट्टी की जांच कराते हैं। लेकिन, क्या मात्र सूती कपड़े ,से यह काम हो सकता है? स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों जमीन में सूती कपड़े दबाए और करीब दो महीने बाद उन्हें निकालकर देखा कि वे कितने गले हैं। अध्ययन में सामने आया कि जिस मिट्टी में कपड़ा जितनी तेजी से टूटा और गला, वहां जैविक गतिविधियां उतनी ही अधिक सक्रिय थीं।

1,000 जगहों पर दबाए गए 2,000 से अधिक कपड़े
प्लांट्स, पीपल, प्लैनेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह शोध वर्ष 2021 में ज्यूरिख विश्वविद्यालय और स्विट्जरलैंड के कृषि अनुसंधान केंद्र 'एग्रोस्कोप' द्वारा शुरू किया गया था। ‘प्रूफ बाय अंडरपैंट्स’ नाम से चलाई गई इस परियोजना में लगभग 1,000 नागरिकों ने हिस्सा लिया।

प्रतिभागियों ने स्विट्जरलैंड के विभिन्न इलाकों में करीब 1,000 स्थानों पर 2,000 से अधिक जोड़ी सूती कपड़े और लगभग 12,000 टी-बैग मिट्टी में दबाए। करीब दो महीने बाद इन कपड़ों और टी-बैग्स को बाहर निकाला गया, उनकी तस्वीरें ली गईं और मिट्टी के नमूने वैज्ञानिकों को भेजे गए। सूती कपड़ा प्राकृतिक रेशों से बना होता है, जिसे मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और केंचुए भोजन के रूप में तोड़ते हैं। इसलिए ज्यादा जैविक सक्रियता वाली मिट्टी में कपड़ा तेजी से गल गया, जबकि कम सक्रियता वाली जगह पर कपड़ा काफी हद तक सुरक्षित पाया गया।

बगीचों की मिट्टी में सबसे तेज और लॉन में सबसे धीमी रही प्रक्रिया
वैज्ञानिकों के अध्ययन में पाया गया कि निजी बगीचों की मिट्टी में सूती कपड़े सबसे तेजी से गले। इसका कारण यह रहा कि बगीचों की मिट्टी में जैविक पदार्थों (ऑर्गेनिक मैटर) की मात्रा अधिक थी, जो सूक्ष्मजीवों को पोषण और अनुकूल वातावरण देते हैं। इसके विपरीत, लॉन की मिट्टी में कपड़े सबसे धीमी गति से गले। वहीं, खेती वाली जमीन और प्राकृतिक घास के मैदानों में जैविक सक्रियता इन दोनों के बीच के स्तर पर रही।

शोधकर्ताओं के अनुसार, जमीन का उपयोग किस तरह किया जा रहा है, इसका मिट्टी के जीवों पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा तापमान और नमी भी अहम भूमिका निभाते हैं; बहुत ठंडी या अत्यधिक सूखी मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता घट जाती है।

मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के लिए क्या करें किसान
अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि मिट्टी सिर्फ पौधे को सहारा देने का माध्यम नहीं है। इसमें मौजूद सूक्ष्मजीव और केंचुए पोषक तत्वों के चक्र को चलाने, मिट्टी में हवा व पानी का संचार बेहतर करने और जल धारण क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।

मिट्टी की जैविक सेहत बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने जरूरी सुझाव दिए हैं, जैसे खेत में जैविक पदार्थों की मात्रा बनाए रखें, फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करें और कंपोस्ट या जैविक खाद का उपयोग करें, फसल चक्र में विविधता लाएं,  जरूरत से ज्यादा रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचें, ताकि मिट्टी के मित्र जीवों को नुकसान न पहुंचे और खेत को लंबे समय तक बिना वनस्पति या पौधों के खुला न छोड़ें, क्योंकि पौधों की जड़ें और अवशेष ही इन सूक्ष्मजीवों के भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं।

कपड़ा गलना पूरी जांच का विकल्प नहीं
शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि सूती कपड़े का बहुत तेजी से गलना हर हाल में मिट्टी के पूरी तरह स्वस्थ होने का पक्का प्रमाण नहीं है। अत्यधिक गतिविधि या कुछ पोषक तत्वों की बहुत ज्यादा मौजूदगी भी मिट्टी में पोषक असंतुलन का संकेत हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, किसान सूती कपड़े के गलने की प्रक्रिया को केवल मिट्टी की जैविक सक्रियता समझने का एक शुरुआती और आसान संकेत मानें। 
 


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