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कम बारिश से गन्ने की पैदावार को खतरा : गन्ने के रस-शीरे से इथेनॉल बनाने पर लग सकती है रोक, चीनी को प्राथमिकता

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 05 Oct 2026 12:04 PM IST
सार

  • नया गन्ना पेराई सीजन शुरू, केंद्र सरकार इथेनॉल पर बड़ा कदम उठा सकती है
  • इथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने की तैयारी
  • गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक का प्लान
  • कम बारिश ने प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार को खतरा
  • नए सीजन में शुरुआती चानी का स्टॉक भी कमजोर है
  • चीनी के लिए गन्ने की उपलब्धता को बढ़ाना चाहती है।

सरकार इथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने की तैयारी में।
सरकार इथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने की तैयारी में। - फोटो : AI
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विस्तार
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अक्तूबर महीने से शुरू हुए 2026-27 गन्ना पेराई सीजन में केंद्र सरकार इथेनॉल को लेकर बड़ा कदम उठाने वाली है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश की वजह से गन्ना की पैदावार लुढ़क सकती है, जिससे चीनी उत्पादन को झटका लग सकता है। इस वजह से सरकार नए सीजन में इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल को सीमित कर सकती है। इस तरह चीनी के लिए गन्ने की उपलब्धता को बढ़ाने की योजना है। दूसरी तरफ 2025-26 सीजन में चीनी उत्पादन में 11 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है, जिस वजह से चीनी का शुरुआती स्टॉक भी कमजोर है। 

गन्ने के रस से बी-हैवी शीरे के इस्तेमाल पर लगेगी रोक
इस कदम के तहत गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने में रोक लग सकती है। एक नवंबर से शुरू होने वाले इथेनॉल सप्लाई सीजन से पहले केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी।

चीनी को प्राथमिकता
हर सीजन के लिए केंद्र सरकार इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल के लिए गन्ने के रस और शीरे की मात्र तय करती है। उद्योग का कहना है कि सरकार और मिलों की सबसे पहले प्राथमिकता बाजार में चीनी की  मजबूत सप्लाई तय करना है।  30 सिंतबर को खत्म हुए गन्ना पेराई सीजन 2025-26 में मिलों ने कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत (30 लाख टन चीनी) इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल के लिए  भेज दी थी।

चीनी का शुरुआती स्टॉक कमजोर 
एक अक्तूबर से नए गन्ना पेराई सीजन की शुरुआत कमजोर हुई है। आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती स्टॉक इस बार  37.5 लाख टन हैस जो बीते सीजन के 50 लाख टन के मुकाबले काफी कम है।

2025-25 में सूखे और बीमारियों से गन्ना उत्पादन में गिरावट
2025-26 पेराई सीजन में रोग, जलभराव और खराब मौसम की वजह से गन्ने की उपज पर असर पड़ा था। इस सीजन में 343 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, जो अगस्त में इथेनॉल वाली मात्रा सहित घटकर 306 लाख टन रह गया। इथेनॉल के बाद चीनी उत्पादन 279 लाख टन रहा, जो सालाना 280 से 285 लाख टन की सालाना घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था। इथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने से चीनी के लिए गन्ने की उपलब्धता बढ़ेगी।

अनाज आधारित एथेनॉल पर निर्भरता बढ़ी
बीते सालों में इथेनॉल उत्पादन में चीनी का हिस्सा 2022-23 के 12 प्रतिशत से गिरकर 20225-26 में 9 प्रतिशत रह गया। अब अनाज इथेनॉल का प्रमुख कच्चा माल बन गया है। जानकारों का कहना है कि इस कदम से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के  लक्ष्य को पूरा करने में कोई बाधा नहीं आएगी।
 
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