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Cotton: एक तरफ सूखे की मार, अब शुल्क-मुक्त आयात की सीमा बढ़ी, तो कपास के घरेलू भाव में गिरावट का खतरा...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 05 Oct 2026 11:16 AM IST
सार

  • देश के कई हिस्सों में कम बारिश ने कपास समते कई फसलों की पैदावार में गिरावट के खतरे को जन्म दिया है
  • विदर्भ के कपास किसान 31 अक्तूबर के बाद शुल्क मुक्त कपास के आयात की छूट खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं
  • एक तरफ कम बारिश से पैदावार में गिरावट का खतरा, शुल्क मुक्त आयात बढ़ने से किसानों की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
  • किसानों को डर है कि सस्ता विदेशी कपास आने से घरेलू बाजार में भाव गिर सकते हैं

सूखे की मार के बाद किसान कपास के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में बढ़ोतरी न होने की उम्मीद कर रहे हैं
सूखे की मार के बाद किसान कपास के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में बढ़ोतरी न होने की उम्मीद कर रहे हैं - फोटो : AI Image
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विस्तार
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अक्तूबर महीने के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में कपास की तुड़ाई का काम शु्रू हो चुका है।  दूसरी तरफ कपास उद्योग शुल्क मुक्त आयात को बढ़ाने की मांग कर रहा है। हालांकि सूखे की मार झेल रहे विदर्भ के कपास किसानों को उम्मीद है कि सरकार कपास के शुल्क मुक्त आयात को आगे नहीं बढ़ाएगी। किसानों का कहना है कि  शुल्क मुक्त आयात में बढ़ोतरी न होने पर उन्हें  अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा। विदर्भ जैसे सूखे की मार झेलने वाले कपास उत्पादक इलाकों के लिए कपास आयात यह का मामला काफी अहम है, क्योंकि एक तरफ कम बारिश ने उपज गिराने का काम किया है, तो दूसरी तरफ आयात शुल्क में कटौती बची हुई उपज के घरेलू भाव को कमजोर कर सकती है।

मिलों के सामने महंगी कपास की परेशानी
सरकार ने 31 अक्तूबर तक कपास के आयात को शुल्क मुक्त किया था। हालांकि एक बार फिर कपड़ा उद्योग इस छूट को आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है। उद्योग का कहना है कि महंगी कपास की वजह से मिलों पर ताला लटक सकता है।

विदर्भ में सूखे से फसल को भारी नुकसान
विदर्भ महाराष्ट्र का सबसे बड़ा कपास उत्पादक इलाका है, जहां ज्यादातर रकबा बारिश पर निर्भर है। बारिश की कमी से कपास की पैदावार में भारी गिरावट का खतरा है। इस खरीफ प्रमुख कपास उत्पादक केंद्र बताए जाने वाले यवतमाल जिलमें 4.5 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है।

 
वैश्विक बाजार में बंपर कपास की उम्मीद, कीमतों में गिरावट के आसार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि भारत में फसल पर मौसम का असर पड़ सकता है, लेकिन दूसरे देशों में बंपर पैदावार के आसार है। आयात को शुल्क मुक्त करने से विदेशी कपास भारतीय बाजारों में प्रवेश करेगी, जिससे घरेलू कीमतों मं गिरावट आएगी।

वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी के एक अधिकारी के अनुसार, भारत में लिंट (बिनौला हटाने के बाद तैयार कपास) का उत्पादन 431 किलो प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है। वहीं, ब्राजील में 2,200 किग्रा और उज्बेकिस्तान में 1,700 किग्रा प्रति हेक्टेयर उत्पादन का अनुमान है।
 


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